ऐतिहासिक भारत-ब्रिटेनमुक्त व्यापार समझौता- नए भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि

PTV BHARAT 25 JULY 2025 लेखक पीयूष गोयल – भारत-ब्रिटेनव्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए)भारतीय किसानों, मछुआरों, कारीगरों और व्यवसायों को वैश्विक स्तर पर पहचान देने के साथ-साथरोज़गार के असंख्य अवसरों कासृजनकरेगा औरप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप लोगों को प्रतिस्पर्धी दरों पर उच्च-गुणवत्ता वाली वस्तुएं प्राप्त करने में सहायता प्रदान करेगा।
भारत औरब्रिटेनव्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए), ऑस्ट्रेलिया, यूरोप के मुक्त व्यापार समझौते और संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य विकसित देशों के साथ इसी तरह के समझौतों के अनुरूप है। यह मोदी सरकार के विकसित भारत 2047 के स्व प्नक को साकार करने के क्रम में आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन को अधिकतम करने की रणनीति का एक हिस्सा है।
प्रधानमंत्री की रणनीति-वर्ष 2014 में, मोदी सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्विक विश्वास को पुन:स्थापित करने तथा इसे भारतीय और विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्यस बनाने के लिए एक दृढ़ रणनीति अपनाई। विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए)पर हस्ताक्षर करना, इस व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है। एफटीए,व्यापार नीतियों के बारे में अनिश्चितताओं को दूर करते हुए निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाते हैं।
विकसित देशों के साथ एफटीए, जिनके भारत के साथ प्रतिस्पर्धी व्यापारिक हित नहीं हैं, दोनों पक्षों के लिए लाभप्रद है, जबकि पिछली सरकार ने भारत के दरवाजे प्रतिद्वंद्वी देशों के लिए खोलकर भारतीय व्यवसायों को खतरे में डालने का रवैया अपनाया था।
यूपीए शासनकाल में, विकसित देशों ने भारत के साथ व्यापार वार्ता लगभग रोक दी थीऔर उस समय भारत को दुनिया की “पाँचकमजोर” अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भारत का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2014 से लगभग तीनगुना बढ़कर लगभग 331 लाख करोड़ रुपये हो गया है। क्रांतिकारी सुधारों, व्यापार में आसानी और प्रधानमंत्री के वैश्विक व्यक्तित्व ने भारत को एक आकर्षक गंतव्यथ के रूप में उभरने मेंसहायता की है। आज, दुनिया भारत की अद्भुत गाथा में भागीदारी के साथ-साथ एफटीए पर हस्ताक्षर करना चाहती है।
बाजार पहुंच, प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त- यह एफटीए ब्रिटेन के बाजार के सभी क्षेत्रों में भारतीय वस्तुओं के लिए व्यापक बाजार पहुंच सुनिश्चित करेगा। यह लगभग 99प्रतिशत टैरिफ लाइनों के टैरिफ को समाप्त करते हुए व्यापार मूल्य के लगभग 100प्रतिशत को कवर करता है। इस समझौते के अंतर्गत 56बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार से सृजित होने वाले व्या पक अवसरों केवर्ष 2030 तक दोगुना होने का अनुमान है।
छोटे व्यवसाय समृद्ध होंगे, क्योंकि भारतीय उत्पादों को प्रतिद्वंद्वियों पर स्पष्ट प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल होगी। फुटबॉल, क्रिकेट उपकरण, रग्बी गेंदें और खिलौने बनाने वाली कंपनियों का ब्रिटेनमें अपने कारोबार में उल्लेखनीय विस्तार होगा।
असंख्य रोज़गार- आकर्षक बाज़ार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त सेनिर्यातस्था यित्वर के साथ-साथ निवेश और रोजगार सृजन मेंवृद्धिहोगी। भारत वस्त्रक, चमड़ा और जूतेसे जुड़े क्षेत्रों में ब्रिटेन को आपूर्ति करने वाले तीन प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक बनने की शानदार स्थिति में है और इससे भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में प्रमुख क्षमता के रूप में उभरने में सहायतामिलने के साथ ही यह छोटे व्या्वसायियों, कारीगरों और महिलाओं को भी सहायता प्रदान करेगा।
रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि होने की आशा है।

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