PTV BHARAT 22 AUGUST 2025 नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में देश में हिंदू-मुस्लिम जैसे धार्मिक विवाद को कम करने का लक्ष्य भी तय किया गया है। यह युद्धों व संरक्षणवादी आर्थिकी निर्णयों से बदलते वैश्विक माहौल में देश के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी भी माना जा रहा है। देश को आर्थिक प्रगति व स्थिरता देने के लिए जरूरी है कि आपसी मतभेद खत्म हो और हिंदू-मुस्लिम मिलकर आगे बढ़ें। मुस्लिम समाज से संवादों का यह सिलसिला संघ की करीबी संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) की ओर से तेज किया जाएगा। आगामी दो माह में दिल्ली में एक बड़े मुस्लिम सम्मेलन के साथ ही देशभर में जिला स्तर पर मुस्लिम बौद्धिक बैठकों का आयोजन होगा। जिसमें संघ पदाधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।इसी तरह, शताब्दी वर्ष में संघ द्वारा लक्षित करीब 20 करोड़ घरों में गृह संपर्क में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में यह जिम्मा एमआरएम उठाएगी। यह निर्णय गुरुवार को हरियाणा भवन में सरसंघचालक मोहन भागवत की एमआरएम के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया, जिसमें संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्णगोपाल, अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल व एमआरएम के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।चर्चा का मुख्य विषय देश की प्रगति की दिशा में कैसे हिंदू मुस्लिम समाज की दूरियां कम हो? कैसे एक भारतीयता की पहचान को मजबूत किया जाए?बैठक में एमआरएम के राष्ट्रीय संयोजक, प्रकोष्ठों व प्रांत संयोजक मिलाकर 40 से अधिक लोग मौजूद रहे।सूत्रों के अनुसार, बैठक में संघ प्रमुख की ओर से मुस्लिम समाज के आर्थिकी व शैक्षणिक विकास के प्रयासों पर जोर देने का निर्णय लिया गया, जिससे वह समाज की मुख्य धारा में आए।सूत्रों के अनुसार, बैठक में मोहन भागवत की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया कि हिंदू-मुस्लिम दो नहीं बल्कि, एक ही हैं। दोनों भारत के अखंड हिस्सा हैं। परंपराओं, पूर्वजों के साथ ही दोनों का डीएनए एक ही है। बैठक में कश्मीर के हालातों पर भी चर्चा हुई तथा वहां के लोगों की बदलती सोच को सकारात्मक बताया गया तथा वहां गृह संपर्क पर विशेष रूप से जोर देने को कहा गया।
दिल्ली में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का सम्मेलन में मोहन भागवत ने एकता पर दिया संदेश
