AO Spine Fellowship के लिए डॉ. विमल अग्रवाल जर्मनी (यूरोप) रवाना

PTV BHARAT 20 SEPT 2025 रायपुर – AO Spine Fellowship के लिए डॉ. विमल अग्रवाल जर्मनी (यूरोप) रवाना हो गए है पीटीवी भारत से चर्चा करते हुए काशी हास्पिटल के डॉ. विमल अग्रवाल कहते है कि आम तौर पर अधिकांश लोगो रीढ़ का आपरेशन नहीं कराने की सलाह देते है। जबकि अब काशी अस्पताल में  विश्वस्त्रीय तकनीकों के जरिए असंभव लगने वाले उपचार भी हो रहे है।उन्होने बताया कि उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी स्पाइन संस्था AO Spine की प्रतिष्ठित फेलोशिप के लिए चुना गया है। इस फेलोशिप में पूरे भारत से केवल कुछ ही चुनिंदा सर्जनों का चयन होता है, और उनमें छत्तीसगढ़ के डॉ. अग्रवाल का नाम शामिल होना प्रदेश के लिए गर्व की बात है। इस फेलोशिप के अंतर्गत वे जल्द ही जर्मनी (यूरोप) जाकर विश्व की अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। यह प्रशिक्षण एक माह का होगा जिसके बाद डॉ. विमल अग्रवाल छत्तीसगढ़ वापस लौटेंगे आपको बता दे कि डॉ. अग्रवाल ने अपनी शिक्षा का सफ़र अनेक चुनौतियों के बावजूद जारी रखा।

            •           एमबीबीएस – एनकेपी साल्वे मेडिकल कॉलेज, नागपुर

            •           डिप्लोमा ऑर्थोपेडिक्स – पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर

            •           एम.एस. ऑर्थोपेडिक्स – जेएसएस मेडिकल कॉलेज, मैसूरु

            •           एफ.एन.बी. स्पाइन सर्जरी – सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली

साधारण ग्रामीण परिवेश और सीमित साधनों से उठकर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। AO Spine Fellowship पूरी दुनिया के लिए स्पाइन सर्जरी का सर्वोच्च प्रशिक्षण मंच है। इसमें चयन होना किसी भी सर्जन के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है।

डॉ. विमल अग्रवाल का संदेश – “मैं गाँव किरारी की उस मिट्टी से निकला हूँ, जहाँ से मैंने संघर्ष करना और सपने देखना सीखा। सीमित साधनों और साधारण परिवेश में पला-बढ़ा, लेकिन मेरे माता-पिता, गुरुजनों और इस मिट्टी की सीख ने मुझे आगे बढ़ने की ताकत दी। AO Spine जैसी दुनिया की सबसे बड़ी संस्था की प्रतिष्ठित फेलोशिप में मेरा चयन मेरे लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि मेरे गाँव, जिला सक्ती और पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान है। यह सिद्ध करता है कि अगर जज़्बा और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता। मेरा संकल्प है कि प्रदेश के मरीजों को अब दिल्ली, मुंबई या विदेश जाने की ज़रूरत न पड़े। वे यहीं छत्तीसगढ़ की धरती पर, अपने ही रायपुर में विश्वस्तरीय इलाज पाएँगे। यही मेरे जीवन का उद्देश्य और सबसे बड़ी साधना है।”

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