अब पुराने एमआरपी के साथ नया एमआरपी लिखना अनिवार्य नहीं- सीए चेतन तारवानी

PTV BHARAT 22 SEPT 2025 भारत सरकार ने 22 सितंबर से जीएसटी दरों में कटौती की घोषणा की है। इसके साथ ही 9 सितंबर और 18 सितंबर को जारी सर्कुलर्स के माध्यम से व्यापारियों, निर्माताओं और पैकिंग करने वालों के लिए नई प्रक्रियाएँ स्पष्ट की गई हैं। नए संशोधनों में व्यवसायियों को कई प्रकार की राहत दी गई है।यह जानकारी चेंबर ऑफ़ कॉमर्स के वाईस चेयरमेंन सीए चेतन तारवानी वीडियो जारीकर साझा की

प्रमुख बदलाव:

  1. एमआरपी स्टिकर अनिवार्यता पर राहत : 9 सितंबर के सर्कुलर के अनुसार व्यापारियों को पुराने और नए एमआरपी दोनों दिखाना अनिवार्य था। 18 सितंबर के संशोधन में यह स्पष्ट किया गया कि यह ऐच्छिक है। यदि व्यापारी चाहें तो नया एमआरपी लगा सकते हैं, अन्यथा अनिवार्यता नहीं है। हालांकि यदि नया एमआरपी लगाया जाता है तो पुराना भी दिखाना आवश्यक होगा।
  2. विज्ञापन देने की अनिवार्यता समाप्त : पहले यह आवश्यक था कि मूल्य में कमी की जानकारी दो समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से दी जाए। नए संशोधन में यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया है।
  3. रिटेलर्स को सूचना देना अनिवार्य : निर्माता और पैकिंग करने वाले व्यापारी अपने रिटेल डीलर्स को पत्र या सर्कुलर के माध्यम से नई दरों की जानकारी अवश्य देंगे। यह नियम 9 और 18 सितंबर दोनों सर्कुलर्स में यथावत है।
  4. पुराने पैकिंग मटेरियल की समयसीमा बढ़ाई गई : पहले पुराने पैकिंग मटेरियल को 31 दिसंबर 2025 तक उपयोग करने की अनुमति थी। अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दिया गया है।

“सरकार ने इस बार प्रक्रियाओं में बड़ा रिलैक्सेशन दिया है। व्यापारी अब बिना अतिरिक्त बोझ के नियमों का पालन कर सकते हैं। हालाँकि, उपभोक्ताओं तक यह संदेश पहुँचाना महत्वपूर्ण है कि दरों में कमी की वजह से वस्तुएँ सस्ती हो गई हैं। इसके लिए व्यापारी स्वयं बोर्ड या फ्लेक्स लगाकर ‘बचत उत्सव’ की शुरुआत कर सकते हैं। मेरा सभी व्यापारियों से आग्रह है कि इस अवसर को व्यावसायिक वृद्धि का माध्यम बनाएं। मेरी शुभकामनाएँ आप सभी के साथ हैं।”

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