PTV BHARAT 05 NOVEMBER 2025 एजेंसी वाराणसी में बुधवार की शाम देव दीपावली के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे और गंगा तट पर देव दीपावली का आयोजन शुरू हुआ तो आयोजन के भावों को गति मिली और प्रकाशपर्व का यह आयोजन चरम पर जा पहुंचा। त्रिपुरासुर के वध के बाद काशी में भगवान शिव को समर्पित देवों की दीपावली काशी में मानो तीनों लोगों के बीच एकरसता ले आई हो। सुबह से घाटों की साफ सफाई के साथ ही सुरक्षा के उपायों के बीच तैयारियां शुरू हो गईं। विभिन्न समितियों की ओर से घाटों और आरती स्थल की साज सज्जा का दौर चला तो काशी वासियों के घाट श्रृंगार का उल्लास भी छलक पड़ा। दोपहर से ही रंगोली बना रही छात्राओं और युवतियों के प्रयास रंगों संग घाट के किनारे एकाकार नजर आने लगे। दोपहर में लोगों का आगमन शुरू हुआ तो शाम ढलने तक अनवरत जारी रहा। कबीर की काशी और काशी के असि घाट पर दोपहर में ही लोग जुटने लगे कार्तिक मास की पूर्णिमा पर काशी की अद्भुत, अलौकिक और दिव्य देव दीपावली ने प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर गंगोत्री सेवा समिति के तत्वावधान में अपनी स्वर्णिम आभा बिखेरी। शाम ढलते ही गोधूलि बेला में दीपों की दपदप, विद्युत झालरों की जगमग, सुरों की खनक, गीत संगीत की धमक तो गगनचुंबी आतिशबाजी की चमक, फूलों की सुवास तो कहीं चटकीले रंगों का वास प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर यह सभी आकर्षण का केंद्र रहे। पहलगाम हमले में शहीद भारतीयों को श्रद्धांजलि और ऑपरेशन सिंदूर के शूरवीरों को समर्पित मां गंगा की अलौकिक आरती देश-विदेश से आए पर्यटकों के दिलों को छू गई। देवताओं के स्वागत में ब्राम्हणों के श्लोक के साथ ” हर हर महादेव‘- हर-हर गंगे ” के महाजाप से माता शीतला का प्रांगण गूंज उठा। 35 वर्षो से चल रही परम्परा के अनुसार प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर नियमित आरती करने वाली संस्था गंगोत्री सेवा समिति के तत्वावधान में गंगा महारानी का पूजन-स्तवन संग दुग्धाभिषेक हुआ। तट पर सिंहासनारूढ़ गंगा महारानी की श्रृंगारिक प्रतिमा और उनकी अलौकिक आरती की निराली छवि निहारने को श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा था।
जैन घाट, निषादराज घाट, माता आनंदमयी घाट सहित विभिन्न घाटों पर जले दीप
