PTV BHARAT 04 DECEMBER 2025 डिजिटल स्क्रीन (स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट) से निकलने वाली नीली रोशनी और लगातार देखना आपकी आंखों की मांसपेशियों पर ज़बरदस्त तनाव डालता है, जिसे डिजिटल आई स्ट्रेन (DES) कहते हैं। 20-20-20 नियम ही कुंजी है हर 20 मिनट बाद, कम से कम 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। यह आँखों की फोकस करने वाली मांसपेशियों (Ciliary Muscles) को आराम देता है।जागरूक होकर पलकें अपकाएं (Blink Consciously): स्क्रीन देखते समय हम सामान्य से 60% कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आँखें सूख जाती हैं। हर ब्रेक में जानबूझकर 10 बार पलकें झपकाएं ताकि आंखों में नमी बनी रहे। सही पोश्वर (Ergonomics): स्क्रीन आपकी आंखों के स्तर से थोड़ी नीचे (लगभग 20 डिग्री) होनी चाहिए और आपसे कम से कम 25 इंच (एक हाय की दूरी) दूर होनी चाहिए। लैपटॉप को ऊपर उठाने के लिए स्टैंड का इस्तेमाल करें। ब्राइटनेस सेटिंग: स्क्रीन की ब्राइटनेस को कमरे की रोशनी के साथ संतुलित रखें। इसे ‘ऑटो-ब्राइटनेस’ मोड पर सेट करना सबसे अच्छा है।
2. बाहर का समयः भविष्य की दृष्टि का कवच (Outdoor Time: The Shield for Future Vision)प्राकृतिक धूप (Natural Light) में समय बिताना मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) के बढ़ते खतरे को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। UV पराबैगनी सुरक्षा को गंभीरता से लेंः धूप में बाहर निकलते समय हमेशा 100% UV-A और UV-B सुरक्षा वाले धूप के चश्मे (Sunglasses) पहनें। सूरज की किरणें कॉर्निया और लेंस को स्थायी नुकसान पहुंचासकती हैं, जिससे बुढ़ापे में मोतियाबिंद (Cataracts) का खतरा बढ़ जाता है।
टोपी का उपयोगः टोपी वा कैप, विशेष रूप से दोपहर के समय, 50% तक UV एक्सपोजर को कम कर सकती है।
3. पोषणः बांखों के लिए सुपरफूड्स (Nutrition: Superfoods for Eyes)आपकी डाइट सीधे तौर पर आपकी आंखों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। कुछ पोषक तत्व मैक्यूलर (रेटिना का केंद्र) को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है। ल्यूटिन (Lutein) और जियाजेंथिन (Zeaxanthin): वे ‘आँखों के विटामिन’ रेटिना को नीली रोशनी ने बचाने वाले फिल्टर की तरह काम करते हैं। इसके लिए पालक, केल (Kale), और अंडे (yoik) खाएं।ओमेगा-3 फैटी एसिडः वे आंखों के सूखेपन (Dry Eyes) को कम करने और रेटिना के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। बखरोट, चिया सीड्स, बलसी के बीज और फैटी फिश (जैसे सैल्मन) का सेवन करें।विटामिन C और E: ये एंटीऑक्सीडेंट आंखों को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाते हैं। खट्टे फल (संतरा, नींबू), स्ट्रॉबेरी गाजर, और बादाम अपनी डाइट में शामिल करें। पानी (Hydration): शरीर में पर्याप्त पानी (हाइड्रेशन) आंखों के आंसू (Tears) के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है, जो सूखापन और जलन को रोकता है।
4. स्वच्छता और संपर्क लेंस सुरक्षा (Hygiene and Contact Lens Safety) आंखों के संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता पहली प्राथमिकता है।आंखें रगड़ने से बचेंः खुजली होने पर आंखों को रगड़ने से कॉर्निया को नुकसान हो सकता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।कॉन्टैक्ट लेंसः नापरवाही न करें! लेंस पहनने वाले टीनएजर्स को सख्त सफाई नियमों का पालन करना चाहिए। लेंस को गंदे हाथों से छूना, या लेंस पहनकर सोना, गंभीर आई इन्फेक्शन (जैसे कॉर्नियल अल्सर) का कारण बन सकता है, जिससे स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है।
5. नियमित जांच बऔर सुरक्षा (Regular Checkups and Safety) नियमित नेत्र जांच केवल नंबर बदलने के लिए नहीं होती, बल्कि यह आंखों की गंभीर बीमारियों का पता लगाने का सबसे अच्छा तरीका हैसालाना विस्तृत जांचः भने ही आपको चश्मे की जरूरत न हो, लेकिन हर साल एक नेत्र विशेषज्ञ (Ophthalmologist/Optometrist) से विस्तृत जांच कराएं। कई समस्याएं (जैसे ग्लूकोमा) शुरुआत में ‘कोई लक्षण नहीं दिखाती हैं। किसी भी लक्षण को नज़रबंदाज़ न करें: लगातार सिरदर्द, आंखों में लाली, बहुत ज्यादा पानी आना, या अचानक धुंधला दिखना- ये सब चेतावनी के संकेत हैं जिन पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।खेलों में सुरक्षात्मक आईवियरः क्रिकेट, बास्केटबॉल, फुटबॉल या अन्य तेज़ गति वाले खेलों में आंखों की चोट का खतरा होता है। ऐसे खेलों में हमेशा उचित फिटिंग वाले सुरक्षात्मक चश्मे (Sports Protective Eyewear) का उपयोग करेंरोपालकों के लिए निर्देश्श :- 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मोबाइल तथा लेपटॉप देखने ना दें। 16 वर्षतक के बच्चों को केवल 2-3 घंटे ही स्क्रीन एक्सपोज़र हो। सामूहिक तौर पर टी वी 4 वर्ष की आयु में 1 घंटा देखा जा सकेगा। प्रतिवर्ष आधा घंटा समय बढ़ाते जाये। सोशल मीडिया 16 वर्ष के पहले देखने की बनुमति न हो।”शिक्षकों के निए सवस्यक सुझाव: विसी भी छात्र/छात्रा को प्रोजेक्ट वर्क या होमवर्क मोबाइल पर बथवा डिजिटली न देवें। ऐसे में किशोरावस्था में ही बड्डों को मोवाइल चलाने लत लग सकती है।प्रत्येक स्कूली छात्र / छात्रा को क्लासरूम में रोटेशन से अग्निभ पंक्ति से पीछे की पंक्ति में बिठाया जाना अनिवार्य है, ताकि MYOPIA रोग का शीघ्र निदान स्वयं शिक्षक ही क्लासरूम में कर सकते हैं। फिर नेत्रविशेषत्र द्वारा अभिभावक की उपस्थिति में नेत्र परीक्षण कर चश्मे प्रदान किये जाते है।इन दिशानिर्देशों का पालन करके टीनएजर्स अपनी आंखों को स्वस्थ, सुरक्षित और उनकी दृष्टि की शक्ति को आने वाले वर्षों तक बरकरार रख सकते हैं। कर कर

