PTV BHARAT 16 MARCH 2026 रायपुर – प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म बहुत ज्यादा महत्व है। यह भगवान शिव को समर्पित है। जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। सोमवार महादेव का प्रिय दिन है, इसलिए इस संयोग का महत्व और भी बढ़ जाता है। सोम प्रदोष व्रत सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और चंद्रमा के दोषों से मुक्ति पाने के लिए विशेष फलदायी माना गया है। आइए इस आर्टिकल में सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि, मंत्र और भोग से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -ऐसी मान्यता है कि प्रदोष काल मेंमहादेवकैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय जो भक्त उनकी आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सोम प्रदोष का व्रत करने से व्यक्ति को आरोग्य का वरदान मिलता है और जीवन में चल रही आर्थिक तंगी दूर होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें।प्रदोष काल में फिर से स्नान कर साफ कपड़े पहनें।मंदिर में या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।शिवजी को चंदन का तिलक लगाएं और बिल्व पत्र, धतूरा, मदार के फूल व अक्षत चढ़ाएं।
भगवान शिव को समर्पित सोम प्रदोष व्रत आज
