PTV BHARAT 01 MAY 2026 एजेंसी नई दिल्ली। कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की कीमतों में रिकार्ड बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार अब इस बात के पुख्ता इंतजाम करने में जुट गई है कि, सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडरों की ब्लैक मार्केटिंग कमर्शियल सेक्टर में न हो पाए।अब इन दोनों के बीच करीब दो हजार रुपये का फर्क हो गया है, जिससे डायवर्शन की आशंका बढ़ गई है।गुरुवार को देर शाम पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी सरकारी तेल कंपनियों (आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल) और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों के साथ विस्तृत विचार विमर्श किया। बैठक में ब्लैक मार्केटिंग (कालाबाजारी) और होर्डिंग (जमाखोरी) को रोकने के लिए तत्काल कदमों पर चर्चा हुई। यह अब तक की सबसे बड़ी एकल बढ़ोतरी है। 5 किलो के छोटे एफटीएल (फ्री ट्रेड एलपीजी) सिलिंडर की कीमत भी 261 रुपये बढ़ाई गई हैं। ये सिलेंडर आमतौर पर गरीब परिवार, मजदूर और अकेले रहने वाले छात्र इस्तेमाल करते हैं। इससे पहले 1 अप्रैल को 195.50 और मार्च को 114.50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हो चुकी थी।इस हिसाब से तीन महीनों में 19 किलो कमर्शियल सिलिंडर की कुल बढ़ोतरी 1,303 रुपये हो गई है। दूसरी तरफ ओएमसी की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि, आम घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो सब्सिडी वाले सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों में भी कोई वृद्धि नहीं की गई है।इस बढ़ोतरी के बाद 19 किलो के कमर्शियल सिलिंडर और सब्सिडी वाले 14.2 किलो घरेलू सिलिंडर के बीच मूल्य अंतर काफी बढ़ गया है। ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को और सख्त निर्देश दिए गए हैं। देश भर में एलपीजी की होर्डिंग और ब्लैक मार्केटिंग पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कार्रवाई जारी है।
कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की कीमतों में रिकार्ड बढ़ोतरी के बाद ब्लैक मार्केटिंग पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कार्रवाई
