PTV BHARAT 03 MAY 2026 रायपुर — भारत वतर्तमान में दुनया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। जनसंख्या की यह स्थित देश के सामने जहाँ वकास के नए अवसर प्रदान करती है, वहीं कई जटिल चुनौतयां भी पेश कर रही है। हालया आंकड़ों के अनुसार, हालांक भारत की जनसंख्या बढ़ रही है, लेकन संतोषजनक बात यह है क इसकी वृद्धि दर (Growth Rate) में नरंतर गरावटि दजर्त की जा रही है। प ् रमुख सां यकीय रुझान: 1. विृद्धि दिर में गराविट: वषर्त 2011-2021 के दशक में जनसंख्या वृद्धि दर 12.5% रहने का अनुमान था, जसके 2021-2031 के दौरान घटिकर 8.4% होने की संभावना है। 2. प्रजनन दिर (TFR): 2024 तक भारत की कुल प्रजनन दर घटिकर 2.12 तक पहुंच गई है, जो ‘प्रतस्थिापन स्तर’ (Replacement Level) के लगभग बराबर है। 3. जनसं या का दिबावि: नम्न वकास दर के बावजूद, मध्य-2063 तक भारत की जनसंख्या 1.67 बलयन के शखर (Peak) तक पहुँचने का अनुमान है। क ् षेत्रीय और जनसां यकीय चुनौप्तियां: देश में जनसंख्या का वतरण असमान है, जससे ‘उत्तर-दक्षिण जनसांख्यकीय अंतर’ (North-South Demographic Divide) पैदा हो रहा है। दक्षिण भारत के राज्यों में प्रजनन दर काफी कम है, जबक उत्तर के कुछ राज्यों में यह अभी भी उच्च बनी हुई है। इसके साथ ही, लंग अनुपात में असंतुलन और तीव्र गत से बढ़ती युवा आबादी (2021 में लगभग 27% युवा) के लए शक्षिा और रोजगार जुटिाना एक बड़ी प्राथमकता बन गई है। व िृद्धि के कारण और परणाम: चकत्सा सुवधिाओं में सुधिार के कारण मृत्यु दर में कमी आई है, जो जनसंख्या वृद्धि का एक मुख्य कारण है। हालांक, ग्रामीण क्षिेत्रों में अशक्षिा, गरीबी और कम उम्र में ववाह जैसी समस्याएं अब भी उच्च जन्म दर की चुनौती पेश कर रही हैं। इसके परणामस्वरूप जमीन, पानी और खाद्यान्न जैसे प्राकृ तक संसाधिनों पर अत्यधिक दबाव बढ़ रहा है और बुनयादी ढांचे ( शक्षिा, स्वास्थ्य) पर बोझ बढ़ रहा है। नष्क र्ष और सरकारी प्रयास: भारत सरकार परवार नयोजन और महला सश तकरण के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि को नयंत्रत करने के लए वभन्न कायर्तक्रम लागू कर रही है। शक्षिा के प्रसार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के परणामस्वरूप प्रजनन दर में सकारात्मक कमी देखी जा रही है, जो भवष्य में एक स्थिर जनसंख्या की ओर इशारा करती है
भारत में जनसंख्या वृद्धि और असंतुलन: अवसर, चुनौतयां और भवष्य कीरूपरेखा
