रायपुर : प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना एवं मत्स्य संपदा योजना से बदली किसान नीरज गुप्ता की तस्वीर

PTV BHARAT 12 JUNE 2026   केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण किसानों के जीवन में नए अवसरों के द्वार खोल रही हैं। प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मछली पालन क्षेत्र के सतत और समग्र विकास के लिए शुरू की गई एक प्रमुख योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में मछली उत्पादन को बढ़ाना, मछुआरों व मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करना और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। दंतेवाड़ा जिले के ग्राम पालनर के किसान श्री नीरज गुप्ता इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं।

खेती पर थी पूरी निर्भरता

         कुछ वर्ष पहले तक नीरज गुप्ता की आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। वे आय बढ़ाने के लिए किसी अतिरिक्त रोजगार की तलाश में थे।

शासकीय योजनाओं से मिला नया अवसर

         इसी दौरान उन्हें मत्स्य विभाग के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन और योजना के तहत प्राप्त अनुदान से उन्होंने तालाब का निर्माण कराया और लगभग दो वर्ष पूर्व मछली पालन का कार्य शुरू किया। प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना ने भी उन्हें कृषि आधारित आयवर्धन गतिविधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

मेहनत और तकनीक ने दिलाई सफलता

         शुरुआती दौर में मछली पालन की तकनीकी जानकारी हासिल करना और तालाब प्रबंधन सीखना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत की। गुणवत्तायुक्त मछली बीज का चयन, संतुलित आहार प्रबंधन और तालाब की नियमित देखरेख से उत्पादन में लगातार वृद्धि होती गई। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज हर माह हो रही 50 हजार रुपये की आय

         निरंतर प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि आज श्री नीरज गुप्ता मछली पालन से प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। बच्चों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को पूरा करना अब पहले की अपेक्षा अधिक आसान हो गया है।

आय के स्रोत बढ़ाकर बने आत्मनिर्भर

       गुप्ता का कहना है कि कृषि के साथ मत्स्य पालन को जोड़ने से उनकी आय के स्रोत बढ़े हैं। शासकीय योजनाओं से मिली सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान किया है। अब वे आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय का विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

भविष्य में करेंगे व्यवसाय का विस्तार

         भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए श्री नीरज गुप्ता कहते हैं कि वे एक और बड़ा तालाब बनाकर रोहू और कतला जैसी उन्नत प्रजातियों की मछलियों का पालन करना चाहते हैं। इससे उनकी वार्षिक आय में और वृद्धि होगी। वे इसके लिए अपनी वर्तमान आय के साथ-साथ शासकीय योजनाओं से मिलने वाली सुविधाओं का भी लाभ उठाने की योजना बना रहे हैं।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

         आज नीरज गुप्ता अपने गांव और आसपास के किसानों को भी मछली पालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि यदि किसान शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो कृषि के साथ मत्स्य पालन भी बेहतर आय और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

       नीरज गुप्ता की उपलब्धि दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, कड़ी मेहनत और शासकीय योजनाओं के प्रभावी उपयोग से किसान अपनी आय बढ़ाकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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