राज्य डेटा की सुरक्षा हेतु उच्चस्तरीय साइबर सुरक्षा कार्यशाला सम्पन्न

PTV BHARAT 24 JUNE 2026 राज्य में डिजिटल गवर्नेंस के निरंतर विस्तार तथा शासकीय सेवाओं के बढ़ते डिजिटलीकरण के मद्देनजर राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों, महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना तथा नागरिक डेटा की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आज रायपुर में “Strengthening Cyber Security Frameworks for State Data” विषय पर राज्य स्तरीय विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यशाला में राज्य शासन के विभिन्न विभागों, बोर्डों एवं निगमों के 120 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, साइबर सुरक्षा पेशेवर तथा राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा चिप्स (CHiPS) द्वारा किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, अंकित आनन्द, आईएएस ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि डिजिटल गवर्नेंस की सफलता नागरिकों के विश्वास पर आधारित है और यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब शासकीय डिजिटल प्रणालियाँ सुरक्षित, विश्वसनीय एवं साइबर खतरों के प्रति सक्षम हों। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि सुशासन, सेवा निरंतरता तथा जनविश्वास से जुड़ा एक रणनीतिक विषय बन चुका है।उन्होंने कहा कि राज्य शासन की प्राथमिकता केवल डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित एवं लचीला (Resilient) बनाना भी है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सभी विभागों को सक्रिय सहभागिता, संस्थागत उत्तरदायित्व तथा समन्वित प्रयासों के माध्यम से कार्य करना होगा।कार्यक्रम में चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य शासन साइबर सुरक्षा को डिजिटल शासन की आधारशिला मानता है तथा राज्य की डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक एवं भविष्य उन्मुख रोडमैप तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के दिशानिर्देश अनुसार साइबर सुरक्षा कार्यशाला में छह विषयगत चर्चा की जाएगी-

* जोखिम आधारित सुरक्षा मूल्यांकन एवं निगरानी

* राज्य डेटा सेंटर (SDC) एवं SWAN नेटवर्क सुरक्षा

* सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC) एवं राज्य CSIRT तंत्र

* सुरक्षा-केंद्रित डिज़ाइन, ज़ीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर एवं लीगेसी सिस्टम आधुनिकीकरण

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए। पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) डॉ. ध्रुव गुप्ता ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act, 2023) की जानकारी देते हुए बताया कि यह एक्ट वर्ष 2027 से पूर्ण रूप से लागू हो जायेगा ।गृह मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव एवं NATGRID के सलाहकार डॉ. सौरभ गुप्ता ने राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा ढांचों को सुदृढ़ बनाने संबंधी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं पर विस्तृत चर्चा की। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के पूर्व वैज्ञानिक-जी एवं डिप्टी डायरेक्टर जनरल श्री सुरेश चंद्रा ने सरकारी डेटा सुरक्षा हेतु मानकीकरण, अनुरूपता मूल्यांकन, प्रमाणन तथा Trusted IT Systems के महत्व को रेखांकित किया।कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को छह विषयगत समूहों में विभाजित कर विस्तृत विचार-विमर्श कराया गया। समूह चर्चाओं में विभागीय अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा राज्य की साइबर सुरक्षा परिपक्वता बढ़ाने, सुरक्षा निगरानी तंत्र को सुदृढ़ बनाने, विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने, नियमित सुरक्षा ऑडिट, साइबर घटना प्रतिक्रिया तंत्र (Incident Response Mechanism) तथा मानव संसाधन क्षमता निर्माण संबंधी अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।कार्यशाला से प्राप्त अनुशंसाओं का संकलन कर राज्य की साइबर सुरक्षा कार्ययोजना को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही चयनित सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर विचारार्थ संबंधित संस्थाओं एवं भारत सरकार को भी प्रेषित किया जाएगा।कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर के निदेशक डॉ. व्ही. रमन्ना राव, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी श्री टी. एन. सिंह, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शशांक पाण्डेय, श्री यू. एस. अग्रवाल, श्री आशीष जायसवाल, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अनुपम आशीष टोप्पो सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने राज्य में सुरक्षित डिजिटल शासन, मजबूत साइबर अवसंरचना तथा नागरिक डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

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