PTV BHARAT 07 AUGUST 2026 – रायपुर : जल संरक्षण से बदला जीवन, धमतरी के भोथापारा में आजीविका डबरी बनी आत्मनिर्भरता का आधार – छत्तीसगढ़ शासन की ग्रामीण आजीविका उन्मुख योजनाएं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड की ग्राम पंचायत भोथापारा में जल संरक्षण, कृषि संवर्धन और स्वरोजगार के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित आजीविका डबरी ने आदिवासी परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिया है।
मानसूनी खेती और मजदूरी पर थी निर्भर आजीविका
ग्राम भोथापारा के अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राही सावित्री-फकीर और फकीर-हलालखोर का परिवार पहले सीमित कृषि भूमि, सिंचाई के अभाव और वर्षा आधारित खेती पर निर्भर था। नियमित आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं होने के कारण परिवार को अक्सर मजदूरी और पलायन का सहारा लेना पड़ता था।
आजीविका डबरी से मिली नई राह
वीबी-जी राम जी योजना के तहत हितग्राहियों की निजी भूमि पर आजीविका डबरी का निर्माण किया गया। इससे वर्षाजल का संचयन संभव हुआ और पूरे वर्ष सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहने लगा। विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन में परिवार ने डबरी में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन शुरू किया। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, संतुलित आहार और नियमित देखभाल के कारण पहले ही चक्र में मछलियों की बिक्री से अपेक्षा से अधिक लाभ प्राप्त हुआ।
सिंचाई, मत्स्य पालन और खेती से बढ़ी आय
आजीविका डबरी का लाभ केवल मछली पालन तक सीमित नहीं रहा। डबरी में संचित जल का उपयोग खेतों की सिंचाई में होने लगा, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ा और सालभर खेती करना संभव हुआ। मत्स्य पालन से हुई अतिरिक्त आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, कृषि निवेश और घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में किया गया। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया।
अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा
सावित्री और फकीर का कहना है कि यदि आजीविका डबरी का लाभ नहीं मिला होता तो उनका परिवार आज भी मजदूरी पर निर्भर रहता। अब वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और गांव के अन्य किसानों को भी आजीविका डबरी के बहुउद्देशीय उपयोग तथा मत्स्य पालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
ग्रामीण विकास का सफल मॉडल
धमतरी जिले में आजीविका डबरी की यह पहल दर्शाती है कि जल संरक्षण, वैज्ञानिक तकनीक और सरकारी योजनाओं के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। भोथापारा के इन आदिवासी परिवारों की सफलता ग्रामीण आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।

