PTV BHARAT 26 AUGUST 2026 – लखनपुर : “भाई का स्नेह, बहनों का अधिकार—विष्णु भैया के साथ आत्मनिर्भर परिवार” – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित ‘बिहान’ कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह दिखा रहा है। लखनपुर विकासखंड के ग्राम पुहपुटरा का मुनिता स्व-सहायता समूह भी इसी बदलाव की मिसाल है।
1.20 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया मछली पालन
मुनिता स्व-सहायता समूह की सचिव श्रीमती निरा राजवाड़े ने बताया कि बिहान से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं ने सामूहिक रूप से मछली पालन को आजीविका का साधन बनाने का निर्णय लिया।
समूह ने 1 लाख 20 हजार रुपये का ऋण लिया, जिसका उपयोग मछली पालन की गतिविधि शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
10 साल की लीज पर लिया तालाब
समूह की महिलाओं ने 10 वर्ष की लीज पर तालाब लिया है। इसी तालाब में मछली पालन किया जा रहा है। महिलाएं तालाब की देखरेख, मछलियों के पालन-पोषण और अन्य संबंधित कार्य सामूहिक रूप से कर रही हैं।
भविष्य में मछलियों की बिक्री से होने वाली आय को समूह की आजीविका और आर्थिक स्थिति मजबूत करने में लगाया जाएगा।
सामूहिक प्रयास से बढ़ा आत्मविश्वास
निरा राजवाड़े ने बताया कि बिहान से जुड़ने से पहले उनके पास नियमित आजीविका का कोई साधन नहीं था। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें दूसरी महिलाओं के साथ मिलकर काम करने और आय का साधन विकसित करने का अवसर मिला।
समूह के जरिए महिलाओं को ऋण, सहयोग और अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जुड़ने का रास्ता मिला है। इससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और भविष्य को लेकर नई उम्मीद पैदा हुई है।
‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में कदम
मुनिता समूह की महिलाएं मछली पालन को केवल आय का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती हैं। उनका लक्ष्य मछली पालन से होने वाली आय को बढ़ाकर समूह की आर्थिक स्थिति मजबूत करना और आगे चलकर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ना है।
निरा राजवाड़े ने बिहान के माध्यम से मिले सहयोग के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को संगठित होकर काम करने, ऋण लेने और अपनी आजीविका गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला है।
मुनिता स्व-सहायता समूह की यह पहल स्थानीय संसाधनों, सामूहिक प्रयास और संस्थागत सहयोग के जरिए ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर तैयार करने की मिसाल बन रही है।

