PTV BHARAT 15 SEPTEMBER 2026 – एमसीबी : राष्ट्रीय राजमार्ग पर पशुओं की सुरक्षा और सड़क हादसों की रोकथाम के लिए विशेष मुहिम
राष्ट्रीय राजमार्ग एवं व्यस्त सड़कों पर आवारा एवं पालतू पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं तथा जनहानि और पशुहानि की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन एवं पशुधन विकास विभाग, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर संतन देवी जांगड़े के नेतृत्व एवं पुलिस अधीक्षक रत्ना सिंह के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग, नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों के सहयोग से एनएच-43 पर विचरण करने वाले निराश्रित पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट लगाए जा रहे हैं।
रात के अंधेरे में दूर से नजर आएंगे पशु
राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात के समय पशुओं के अचानक सड़क पर आ जाने से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेडियम बेल्ट लगाने की पहल की गई है। वाहन की हेडलाइट पड़ते ही रेडियम बेल्ट दूर से चमकेंगे, जिससे वाहन चालकों को सड़क पर मौजूद पशु पहले ही दिखाई दे जाएंगे। इससे वाहन चालक समय रहते गति नियंत्रित कर सकेंगे और दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी
अभियान के तहत एनएच-43 के प्रमुख संवेदनशील स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी तिराहा, एलआईसी कार्यालय, खेड़िया टॉकीज, सिद्ध बाबा मंदिर घाट, घुटरीटोला बैरियर तथा कठौतिया से महाराजपुर बैरियर के आसपास बड़ी संख्या में घूमने वाले पशुओं को चिन्हित कर उनके गले में रेडियम बेल्ट लगाए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में 500 से अधिक घुमंतू पशुओं के विचरण को देखते हुए अभियान को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है।
चार टीमों के साथ लगातार जारी है अभियान
सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर मोबाइल वेटरनरी यूनिट सहित कुल चार टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों द्वारा लगातार राष्ट्रीय राजमार्ग एवं आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर निराश्रित पशुओं को चिन्हित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत अब तक 346 से अधिक पशुओं को रेडियम बेल्ट लगाए जा चुके हैं और यह कार्य निरंतर जारी है।
पालतू पशुओं की पहचान के लिए 104 की टैगिंग
सिर्फ निराश्रित पशुओं की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अपने पशुओं को खुले में छोड़ने वाले पशुपालकों को जागरूक करने के साथ-साथ पालतू पशुओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभाग द्वारा पालतू पशुओं को चिन्हित कर उनके कानों में टैग लगाए जा रहे हैं। अब तक 104 पशुओं की टैगिंग की जा चुकी है। टैगिंग से पशु के मालिक की पहचान आसानी से की जा सकती है। साथ ही पशु चोरी होने, बीमा संबंधी कार्यवाही, मृत पशु के पोस्टमार्टम तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने में भी यह उपयोगी साबित होती है।
पशुपालकों से की गई हाईवे पर मवेशी नहीं छोड़ने की अपील
पशुधन विकास विभाग के उपसंचालक डॉ. तनवीर अहमद ने आम नागरिकों एवं पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने मवेशियों को राष्ट्रीय राजमार्ग अथवा व्यस्त सड़कों पर खुला न छोड़ें। उन्होंने कहा कि पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने से न केवल पशुओं की जान सुरक्षित रहेगी, बल्कि वाहन चालकों एवं आम नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
पशुधन विभाग की टीम निभा रही सक्रिय भूमिका
अभियान को सफल बनाने में पशुधन विकास विभाग के डॉ. विनीत कुमार भारद्वाज (प्रभारी), विकेश कुमार पैकरा, रूपेन्द्र कुमार पटेल, गगन कुमार निषाद, शशिकांत पांडेय, संदीप कुमार यादव, मनीष यादव, मेवालाल सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। जिला प्रशासन की इस पहल से एनएच-43 पर रात के समय पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के साथ-साथ पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।

