PTV BHARAT 17 SEPTEMBER 2026 – गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : सेवा संकल्प अभियान, आजीविका मिशन और बिहान के सहयोग से सीता मरावी ने रचा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय
जीपीएम जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की सीता मरावी की सफलता ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है। महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने आर्थिक गतिविधियों की शुरुआत की और आज किराना दुकान तथा मुर्गी व्यवसाय के माध्यम से उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
सीता मरावी वंदना महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिला। उन्होंने बैंक लोन तथा समूह के माध्यम से प्राप्त सीआईएफ एवं आरएफ की राशि से 25 हजार रुपये की सहायता लेकर गांव में किराना दुकान शुरू की। इसके बाद समूह के संकुल से 50 हजार रुपये की राशि प्राप्त कर मुर्गी व्यवसाय भी प्रारंभ किया।
दोनों व्यवसायों को उन्होंने मेहनत, लगन और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया। अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया। आज सीता मरावी अपने गांव में ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना रही हैं।
‘लखपति दीदी’ संकल्प से जुड़ी आत्मनिर्भरता की कहानी
सीता मरावी की सफलता ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उनकी आजीविका और उद्यमिता को मजबूत करने की केन्द्र सरकार की पहल से भी जुड़ती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन केन्द्र प्रायोजित योजना है, जिसे केन्द्र और राज्य सरकारों की साझेदारी से लागू किया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर वित्तीय समावेशन, आजीविका और छोटे उद्यमों को बढ़ावा दिया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘लखपति दीदी’ के संकल्प को प्रमुखता दी गई है। इस पहल का उद्देश्य स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को टिकाऊ तरीके से कम से कम एक लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। इसके लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बैंक ऋण, उद्यमिता और आजीविका गतिविधियों के विस्तार जैसी व्यवस्थाओं को जोड़ा गया है। केन्द्र सरकार के अनुसार जुलाई 2026 तक देशभर में 10.08 करोड़ ग्रामीण परिवार लगभग 92 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़े थे और 3.46 करोड़ से अधिक स्व-सहायता समूह सदस्यों को ‘लखपति दीदी’ के रूप में सक्षम बनाया जा चुका था।
छत्तीसगढ़ में लाखों महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से मिला मंच
केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2.79 लाख स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं और लगभग 29.78 लाख महिलाएं इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो रही हैं।
स्व-सहायता समूहों को मिलने वाले रिवॉल्विंग फंड (आरएफ), कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) तथा बैंक लिंकेज जैसी व्यवस्थाएं महिलाओं को अपनी आजीविका गतिविधियों को शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय आधार उपलब्ध कराने में मदद करती हैं। केन्द्र सरकार के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आरएफ और सीआईएफ के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को पूंजी उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
सीता मरावी की कहानी में भी समूह से मिली वित्तीय सहायता का उपयोग किराना दुकान और मुर्गी व्यवसाय शुरू करने में किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्व-सहायता समूह केवल महिलाओं को संगठित करने का माध्यम नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का आधार भी बन रहे हैं।
किराना दुकान से मुर्गी व्यवसाय तक, बढ़े आय के अवसर
सीता मरावी ने एक ही व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आय के अलग-अलग स्रोत विकसित किए। किराना दुकान ने उन्हें गांव में ही नियमित व्यवसाय का अवसर दिया, जबकि मुर्गी पालन ने उनकी आय में एक और स्रोत जोड़ा। दोनों गतिविधियों को उन्होंने निरंतर मेहनत और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया।
सीता मरावी बताती हैं कि महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह से मिले आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन से उन्हें स्वरोजगार शुरू करने का अवसर मिला। आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं और गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
महतारी वंदन योजना से मिला अतिरिक्त आर्थिक संबल
सीता मरावी को महतारी वंदन योजना के तहत 31वीं किस्त की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में उन्हें सहयोग मिल रहा है। स्व-सहायता समूह से मिली सहायता, विभिन्न आजीविका गतिविधियों और स्वयं की मेहनत के साथ उन्होंने आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अपनी अलग पहचान बनाई है। अपनी जिंदगी में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए सीता मरावी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है।
सेवा संकल्प अभियान में सामने आई आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई सीता मरावी की कहानी बताती है कि जब ग्रामीण महिलाओं को संगठन, वित्तीय सहयोग, मार्गदर्शन और आजीविका के अवसर मिलते हैं, तो वे अपनी मेहनत और हुनर के बल पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती हैं।
सीता मरावी की यात्रा स्व-सहायता समूह से शुरू होकर स्वरोजगार और लखपति दीदी बनने तक पहुंची है। केन्द्र सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ संकल्प और राज्य में संचालित बिहान की गतिविधियों के माध्यम से तैयार हो रहा यह वातावरण ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर दे रहा है। देशभर में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय समावेशन और उद्यमिता से जोड़ने पर केन्द्र सरकार लगातार जोर दे रही है।
सीता मरावी अब केवल अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने वाली महिला नहीं, बल्कि अपने गांव में यह संदेश देने वाली प्रेरक महिला हैं कि अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी अपने हुनर को व्यवसाय में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख सकती हैं।

