रायपुर : मातृ-रूपेण संस्थिता : महिला चिकित्सकों ने जटिल सर्जरी कर बचाई एक माँ की जान

PTV BHARAT 15 OCTOBER 2026 – रायपुर : मातृ-रूपेण संस्थिता : महिला चिकित्सकों ने जटिल सर्जरी कर बचाई एक माँ की जान

नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना कर नारी शक्ति के सामर्थ्य को नमन किया जाता है। इसी मातृशक्ति का प्रेरक स्वरूप पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में देखने को मिला। यहां महिला चिकित्सकों की टीम ने अपने चिकित्सकीय कौशल, साहस और समर्पण से एक माँ को नया जीवन दिया।

32 वर्षीय महिला गंभीर प्रसूति जटिलता से जूझ रही थी। उसकी बच्चेदानी और मूत्राशय बुरी तरह फट गए थे। गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो चुकी थी और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की जान पर बन आई थी। ऐसे कठिन समय में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने लगभग पांच घंटे तक जटिल सर्जरी की। इस दौरान मरीज को 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटक चढ़ाए गए।

सर्जरी के बाद महिला को दो दिनों तक वेंटिलेटर पर रखकर गहन उपचार दिया गया। अंततः चिकित्सकों के अथक प्रयास सफल हुए और महिला स्वस्थ होकर अपने परिवार के पास लौट गई। नवरात्रि में नारी शक्ति के साहस, समर्पण और सेवा भावना का यह प्रेरक उदाहरण है। एक ओर जहां देवी स्वरूपा माँ की आराधना की जा रही है, वहीं महिला चिकित्सकों ने अपने ज्ञान, कौशल और सेवाभाव से एक माँ को जीवनदान दिया।

शक्ति केवल आराधना में नहीं, सेवा में भी है

पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने कहा कि नवरात्रि हमें शक्ति, साहस और करुणा का संदेश देती है। अंबेडकर अस्पताल में एक माँ का जीवन बचाने की यह घटना इस भावना को जीवंत करती है कि शक्ति केवल आराधना में ही नहीं, बल्कि सेवा में भी है। महिला चिकित्सकों ने अपने ज्ञान और अनुभव से गंभीर मरीज की जान बचाने का हरसंभव प्रयास किया। वहीं, विभिन्न विभागों की टीम ने एकजुट होकर चिकित्सा सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की टीम ने अथक प्रयास कर एक माँ को नया जीवन दिया है। यह मातृशक्ति के प्रति सच्चे सम्मान और सेवाभाव का प्रतीक है। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाला प्रत्येक मरीज अपने परिवार की आशा, उम्मीद और अपनों का सहारा होता है।

सामान्य प्रसव की स्थिति से जानलेवा आपातकाल तक

32 वर्षीय महिला अपनी चौथी गर्भावस्था में थी। गर्भावस्था की पूरी अवधि समाप्त होने के बाद उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन उसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर नजदीकी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां उपचार शुरू हुआ।

इसी दौरान प्रसव के प्रयास में महिला की बच्चेदानी और मूत्राशय बुरी तरह फट गए। गर्भस्थ शिशु की पेट के भीतर ही मृत्यु हो गई और महिला को भारी रक्तस्राव होने लगा। उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे अंबेडकर अस्पताल, रायपुर लाया गया। चिकित्सकों के सामने चुनौती बेहद कठिन थी। समय कम था, स्थिति गंभीर थी और महिला की जान बचाने के लिए तत्काल निर्णय लेना आवश्यक था।

पांच घंटे की जटिल सर्जरी, 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटकों का आधान

मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए तत्काल उपचार शुरू किया गया और आपातकालीन सर्जरी की तैयारी की गई। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल के नेतृत्व में डॉ. नीलम सिंह, डॉ. अर्पणा वर्मा और डॉ. नीति गोसाई की टीम ने जटिल सर्जरी को अंजाम दिया।

बच्चेदानी बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण उसे निकालना पड़ा। वहीं, सर्जरी विभाग की डॉ. प्राची के सहयोग से क्षतिग्रस्त मूत्राशय की मरम्मत की गई। निश्चेतना विभाग से डॉ. अमृता की टीम ने मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने और सर्जरी के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लगभग पांच घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी के दौरान मरीज को कुल 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटकों का आधान किया गया। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और चिकित्सकों के त्वरित निर्णय ने इस चुनौतीपूर्ण उपचार को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

ऑपरेशन के बाद भी जारी रही जीवन बचाने की जंग

सर्जरी के बाद भी मरीज की स्थिति गंभीर बनी हुई थी। उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी और क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में भर्ती किया गया। यहां डॉ. ओ.पी. सुंदरानी की टीम की देखरेख में दो दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट के साथ गहन चिकित्सा प्रदान की गई।

स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के साथ निश्चेतना, क्रिटिकल केयर, सर्जरी, ब्लड बैंक और नर्सिंग टीम ने लगातार समन्वय के साथ उपचार जारी रखा। निरंतर निगरानी और सामूहिक प्रयासों से मरीज की स्थिति में सुधार हुआ। अंततः वह खतरे से बाहर आई और स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपने घर लौट गई।

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