PTV BHARAT 29 OCTOBER 2026 – रायपुर : चिकित्सा महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव ‘इम्पेटस-2026’ में उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत, मुख्य सचिव विकासशील ने विद्यार्थियों को दिया सफलता का मंत्र
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में वार्षिक उत्सव ‘इम्पेटस-2026’ का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की 63 वर्षों की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा को समर्पित इस उत्सव में विद्यार्थियों ने विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक, खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उत्सव के अंतर्गत गीत-संगीत पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘यूफोरिया-2026’ आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने संगीत की विभिन्न विधाओं में मनमोहक प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बुधवार शाम महाविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव विकासशील ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त रितेश अग्रवाल तथा महाविद्यालय के पूर्व डीन डॉ. चंद्र कुमार शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित रहे।
महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने मुख्य अतिथि के समक्ष वार्षिक प्रतिवेदन 2025-2026 प्रस्तुत करते हुए बताया कि पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, मरीजों के उपचार और संस्थागत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) से एमबीबीएस की सीटें 230 से बढ़ाकर 250 करने की स्वीकृति प्राप्त हुई। इसके साथ ही सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में नई सीटों की मंजूरी, विदेशी चिकित्सा स्नातकों की इंटर्नशिप सीटों में 17 से बढ़ाकर 64 तक विस्तार तथा स्नातकोत्तर और एलाइड हेल्थ साइंस पाठ्यक्रमों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
प्रदेश के 10 शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों को जोड़ने वाली टेली-शिक्षा व्यवस्था, टेलीरेडियोलॉजी नेटवर्क, संकाय सदस्यों का प्रशिक्षण और राष्ट्रीय नियामक संस्थाओं से प्रमाणन जैसी पहलें संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता एवं प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने में सहायक रही हैं।
चिकित्सालय के विभिन्न विभागों ने लाखों मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हुए जटिल सर्जरी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कैंसर उपचार, नेत्र चिकित्सा, अस्थि रोग, आपातकालीन चिकित्सा और रक्त सेवाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज कीं। अनुसंधान एवं निदान सुविधाओं के विस्तार के साथ 1.40 करोड़ रुपये के सिविल निर्माण कार्य, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीदी, केंद्रीय पुस्तकालय का नवीनीकरण, छात्रावास सुविधाओं में सुधार, स्मार्ट क्लासरूम, चिल्ड्रन पार्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया गया। ये उपलब्धियां संस्थान के चिकित्सकों, शिक्षकों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों और छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग का परिणाम हैं।
मुख्य सचिव विकासशील ने विद्यार्थियों को दिया संवेदनशील चिकित्सक बनने का संदेश
मुख्य अतिथि विकासशील ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने जिस समर्पण और उत्साह के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विद्यार्थियों के जीवन में पढ़ाई, परीक्षाएं और पर्याप्त नींद तीन प्रमुख चुनौतियां होती हैं। अक्सर इन तीनों में से केवल दो के बीच ही संतुलन बन पाता है। नीट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कई विद्यार्थियों को लगता है कि जीवन की सबसे कठिन चुनौती समाप्त हो गई है, लेकिन चिकित्सा महाविद्यालय में प्रवेश के बाद उन्हें एहसास होता है कि नीट तो परीक्षाओं की लंबी श्रृंखला की शुरुआत भर थी।
उन्होंने विद्यार्थियों से तीन महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। पहली, चिकित्सा विज्ञान होने के साथ-साथ एक कला भी है। तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन वे मानवीय संवेदना, करुणा और बीमारी से भयभीत मरीज को भरोसा दिलाने की क्षमता का स्थान नहीं ले सकतीं। एक अच्छा डॉक्टर बनने के लिए ज्ञान और तकनीकी दक्षता के साथ मरीज की भावनाओं को समझना भी आवश्यक है।
दूसरी बात, महत्वाकांक्षी बनें, लेकिन स्वयं को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से न लें। जीवन केवल अच्छे अंक प्राप्त करने, रैंक हासिल करने और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश पाने तक सीमित नहीं है। वास्तविक सफलता अच्छे संबंध बनाने, समाज के लिए योगदान देने और एक बेहतर इंसान बनने में भी निहित है। जीवन में हर लक्ष्य तुरंत प्राप्त नहीं होता। असफलताओं और अप्रत्याशित परिस्थितियों को स्वीकार करना सीखें और अपने प्रयास जारी रखें।
तीसरी बात, जीवन की खुशियों को भविष्य के लिए टालते न रहें। चिकित्सा शिक्षा के दौरान बनने वाली मित्रताएं, छात्रावास में बिताए गए पल, देर रात तक होने वाली बातचीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य और खेलकूद जीवन की अनमोल स्मृतियां बनते हैं। संभव है कि भविष्य में विद्यार्थियों को शरीर रचना विज्ञान या विकृति विज्ञान में प्राप्त अंकों की याद न रहे, लेकिन मित्रों और उनके साथ बिताए खुशनुमा पलों को वे हमेशा याद रखेंगे। इसलिए पढ़ाई और पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ जीवन में आनंद और संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
मुख्य सचिव ने कहा कि चिकित्सा को केवल एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के अवसर के रूप में देखना चाहिए। एक सफल डॉक्टर वह नहीं है, जो केवल बीमारियों का उपचार करता है, बल्कि वह है जो मरीज की बात ध्यान से सुनता है, उसकी समस्याओं को समझता है और उसे विश्वास एवं सम्मान के साथ उपचार प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को ज्ञानवान, संवेदनशील और करुणाशील चिकित्सक बनने तथा जीवनभर सीखने, प्रश्न पूछने और अनुभवों से स्वयं को बेहतर बनाने की भावना बनाए रखने की शुभकामनाएं दीं।
पंथी नृत्य ने बांधा समां
चिकित्सा छात्रों द्वारा बाबा गुरु घासीदास जी के जीवन, आदर्शों और शिक्षाओं पर आधारित पंथी नृत्य की प्रस्तुति ने सभी का दिल जीत लिया। इसी प्रकार 2025 बैच की श्रुति सिंह ने बॉलीवुड के मिक्स गीतों पर सोलो डांस प्रस्तुत किया। दिव्या मिंज ने ‘तेनु काला चश्मा’, ‘बावन गज का दामन’ और जियाना कुरैशी ने ‘जिया जले’ गीत पर प्रस्तुति दी। हर्षिता साहू ने ‘प्रेम की लीला’ पर प्रस्तुति दी, जबकि अर्णव बिसेन ने कीबोर्ड बजाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम को यादगार बनाया।
‘अनारकली की मीनार’ नामक प्रहसन के माध्यम से मासिक धर्म से जुड़े मिथकों और सामाजिक भ्रांतियों को उजागर किया गया। विभिन्न भूमिकाएं निभाने वाले चिकित्सा छात्रों ने बताया कि मासिक धर्म से जुड़ी कई सामाजिक भ्रांतियों का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। यह महिलाओं के शरीर की एक सामान्य और प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है।

