अब 1986 और 1993 के दंगों का सच भी आएगा सामने, संभल पुलिस तलाशेगी फाइलें – SP

PTV BHARAT 23 JAN 2025     संभल।  शहर के खग्गू सराय में 14 दिसंबर को पलायन के बाद से उपेक्षित शिव मंदिर के सामने आने के बाद 1978 का साप्रदायिक दंगा सुर्खियों में आया। लेकिन, अब उससे पहले 1986 और 1993 में जो दंगे हुए थे। उनके पीड़ित भी दोबारा जांच की मांग उठा रहे हैं। पीड़ित लोग न्यायिक जांच आयोग के अब एसपी से मिले हैं। एसपी ने उन्हें इस संबंध में शासन स्तर पर पत्राचार करते हुए पुराने मुकदमों की फाइल निकलवाकर जांच करवाने का आश्वासन दिया है। पुराने दंगों के संबंध में पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि पुराने दंगे के दौरान जिनके पिता की हत्या हुई थी वो पीड़ित पुत्र आए थे। इस संबंध में शासन को पत्राचार किया जाएगा। जो, प्राथमिकी उस समय दर्ज हुई थी। उसे मुरादाबाद से निकलवाई जाएगी। जांच कराई जाएगी कि क्या दिनेश चंद्र शर्मा की हत्या दंगा में ही हुई थी। उसके बाद अग्रिम कार्रवाई होगी। इस संबंध मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को भी पत्र लिखा जाएगा। बुधवार को थाना कैलादेवी क्षेत्र के गांव पेली निवासी शशांक शर्मा ने पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई से मुलाकात की और 1993 के दंगे में हुई पिता दिनेश चंद्र शर्मा की हत्या के मामले में दोबारा जांच कराने की गुहार लगाई।शशांक ने बताया कि 1993 में अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने पर दंगा हुआ था, जिसमें उनके पिता की हत्या कर दी गई। पिता प्राइवेट शिक्षक थे और तीन जनवरी 1993 की शाम को टयूशन पढ़ाने के लिए निकल थे। फिर शाम को वापस नहीं लौटे। अगली सुबह चार जनवरी को पिता की संभल के मुहल्ला बेगम सराय स्थित तालाब में लाश मिली थी। शरीर पर 62 घाव थे। चाकू से गाेंदकर मारा गया था। उस मामले में दादा की तरफ से केस दर्ज हुआ था लेकिन, यह मुकदमा गवाहों के मुकरने से खत्म हो गया। उस समय कोतवाली के प्रभारी कालीचरन थे और पुलिस अधीक्षक राजबाला। कई बार गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं हो पाई। बताया कि उस समय सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क का भी बहुत दवाब था। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई नहीं होने दी थी। लेकिन, अब शासन-प्रशासन सख्त है। इसलिए पिता की मौत का इंसाफ चाहता हूं।उधर, मुहल्ला कोर्ट पूर्वी के रहने वाले राष्ट्र बंधु रस्तोगी का कहना है कि उनके पिता भगवत सरन थे। 1986 में चमन सराय से अस्पताल के चौराहे तक नेजा मेला लगा था। वहां मुस्लिमों को मारने की अफवाह फैलने पर दंगा भड़क गया। अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई थी। उसी दिन भाजपा की नेता पुष्पा सिंघल आई हुईं थी और उन्हीं का लेक्चर सुनने के लिए मेरे पिता घर से निकले थे। पहले उन्हें चीनी लेकर आनी थी। सो, चीनी लेने घर से गए थे। तभी मुस्लिम दुकानदार ने उन्हें बंद कर हत्या कर दी। विश्वासघात में उनकी हत्या हुई। उस घटना का मुकदमा मुरादाबाद तक चलाया और वह तीन-चार साल तक मुकदमा चला, काफी मेहनत और पैरवी करने के बाद भी उन्हें सजा नहीं हुई। इस मुकदमे में साक्ष्यों के अभाव में आरोपित बरी हो गए।

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