PTV BHARAT 05 MAR 2025 नई दिल्ली। पूजा स्थल कानून 1991 के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल हुई है जिसमें पूजा स्थल कानून की धारा 4(2) को चुनौती दी गई है। यह धारा अदालतों के धार्मिक स्थल की प्रकृति बदलने से संबंधित मुकदमों की सुनवाई पर रोक लगाती है। याचिका में मांग है कि धारा 4(2) को इसी कानून की प्रस्तावना का उल्लंघन करने वाली और संविधान के अनुच्छेद 14, 21 ,25 और 26 (समानता और धार्मिक स्वतंत्रता) के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने वाली घोषित किया जाए। कानून पूजा स्थल के ढांचे को नहीं बल्कि धार्मिक स्वरूप को संरक्षित करता है। कहा गया है कि मूल चरित्र इमारत का सर्वे किये बगैर तय नहीं हो सकता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर ही लगातार दाखिल हो रही नयी याचिकाओं पर ऐतराज जताया था और कहा था कि अब बहुत हो गया, कोर्ट इस मामले में कोई नयी याचिका पर विचार नहीं करेगा। यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट घोषित करे कि सक्षम अदालत को धार्मिक स्थल का मूल चरित्र तय करने के संबंध में उचित आदेश पारित करने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट में यह नयी याचिका कानून के छात्र नितिन उपाध्याय ने दाखिल की है।कहा है कि कोर्ट घोषित करे कि पूजा स्थल कानून पूजा स्थल के मूल चरित्र को बदलने की मनाही करता है, उसकी इमारत के ढांचे को बदलने की नहीं।
पूजा स्थल कानून में धार्मिक स्थान से जुड़े मुकदमे पर रोक को SC में चुनौती
