जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ मानसून सत्र में आ सकता है महाभियोग प्रस्ताव

PTV BHARAT 28 MAY 2025  नई दिल्ली। दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। माना जा रहा है कि उन्हें पद से हटाने की तैयारी चल रही है।पता चला है कि सरकार संसद के मानसून सत्र में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव ला सकती है। गत आठ मई को भारत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा के घर नकदी मिलने के मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा था और उसके साथ ही तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट भी उन्हें भेजी थी।जस्टिस खन्ना ने आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट पर जस्टिस यशवंत वर्मा का जवाब भी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से साझा किया था। माना जा रहा है कि जस्टिस खन्ना ने अपने पत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने की सिफारिश की थी।सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीश को संसद में महाभियोग लाकर ही हटाया जा सकता है। वैसे महाभियोग की प्रक्रिया काफी जटिल है और आज तक कोई भी न्यायाधीश इस प्रक्रिया से नहीं हटाया गया है।घटना के वक्त जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यरत थे, आजकल उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया है। जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में 14 मार्च की रात 11.35 पर आग लग गई थी। अग्निशमन टीम को आग बुझाने के दौरान उनके आवास में स्थित एक स्टोर रूप में भारी मात्रा में जली हुई नकदी मिली थी।तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना ने मामले की जांच के लिए तीन न्यायाधीशों की कमेटी गठित की थी। कमेटी ने गत चार मई को अपनी रिपोर्ट सीजेआई को सौंप दी थी। माना जा रहा है कि तीन न्यायाधीशों की कमेटी ने जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों को सही पाया। हालांकि जस्टिस वर्मा ने पहले ही आरोपों से इन्कार करते हुए इसे उन्हें फंसाने की साजिश बताया था। तत्कालीन सीजेआइ ने कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पालन करने हुए वह रिपोर्ट जस्टिस वर्मा को भेजी थी और उनसे उस पर जवाब भी मांगा था। जस्टिस वर्मा ने छह मई को अपना जवाब सीजेआई को सौंप दिया था।

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