PTV BHARAT 17 JULY 2025 एजेंसी नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन में शांति स्थापित करने की अपनी रणनीति को असफल होते देख राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत, चीन जैसे रूस के सहयोगी देशों पर दबाव डालने लगे हैं कि वह मौजूदा युद्ध को समाप्त कराने में सहयोग करें। यही नहीं अमेरिकी सरकार इन देशों को यह धमकी भी देने लगी है कि अगर उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन को शांति के लिए तैयार नहीं किया तो इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा। यह खामियाजा रूस से कारोबार करने के एवज में इन देशों पर अमेरिका की तरफ लगाए गए शुल्क को लेकर होगा। नाटो सचिव जेनरल मार्क रूट ने मंगलवार को इस बारे में अमेरिकी नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि, “दिल्ली, बीजिंग या ब्राजील के राष्ट्रपति को रूस के राष्ट्रपति को शांति वार्ता के लिए तैयार करना होगा नहीं तो इसका बहुत बड़ा असर इन देशों पर होगा।” रूट हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप की उस घोषणा के संदर्भ में उक्त बात कही है जिसके मुताबिक अगर रूस 50 दिनों के भीतर शांति वार्ता के लिए तैयार नहीं होता है तो उससे सामान खरीदने वाले देशों पर 100 फीसद अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा। जब से यूक्रेन यु्द्ध की शुरुआत हुई है तभी से भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद करने वाला सबसे बड़ा देश बन चुका है।भारत का कहना है कि वह रूस से तेल खरीद कर वैश्विक तेल बाजार को संतुलित रखता है। इससे कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रखने में मदद मिली है। जबकि अमेरिका व पश्चिमी देशों का कहना है कि भारत तेल खरीद कर रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में परोक्ष तौर पर मदद कर रहा है।
रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका ने फिर दी चेतावनी
