PTV BHARAT 28 SEPT 2025 रायपुर।राजधानी की रायपुर के विभिन्न बस्यिों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने विजयदशमी उत्सव उत्साहपूर्वक मनाया। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गायत्री नगर बस्ती कृषक नगर के प्राथमिक विद्यालय परिसर विजय नगर में प्रातः 8 बजे कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बाल स्वयंसेवकों से लेकर वरिष्ठ स्वयंसेवकों तक ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री डी डी मिश्रा सेवानिवृत्त अपर संचालक कृषि विभाग थे मुख्य वक्ता संघ के जिला कार्यवाह पंकज ने अपने संबोधन में कहा कि यह वर्ष न केवल संघ की यात्रा का उत्सव है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में इसके योगदान का स्मरण भी है। उन्होंने बताया कि सौ साल पहले एक छोटे विचार के रूप में शुरू हुआ संघ आज एक विशाल संगठन के रूप में राष्ट्र को मजबूती प्रदान कर रहा है। भारत माता की प्रार्थना के बाद शस्त्र पूजन के साथ स्वयंसेवकों ने पथ संचलन शुरू किया
इसी तरह पुरानी बस्ती, भाटागांव के शासकीय विद्यालय भाठागांव चौक रायपुर
में 8:00 से 10:00 तक विजयदशमी उत्सव उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य अतिथि वेदु राम धनगर, वरिष्ठ वकील थे मुख्य वक्ता आकाशदीप गुप्ता, महानगर सह कार्यवाह ने अपने संबोधन में कहा कि संघ के संस्थापक परम पूज्य डॉ बलिराम हेडगेवार जी ने व्यक्ति निर्माण से समष्टि निर्माण का जो मूल मंत्र दिया वह तमाम प्रतिबंधों के बावजूद भारत के विकास में योगदान दे रहा है।
उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन – सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का भाव, नागरिक कर्तव्य के प्रति साकारात्मक व्यवहार के पालन का आग्रह किया। रायपुरा नगर
बस्ती : महादेव घाट के महादेव प्रभात शाखा में विजयदशमी उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया मुख्य अतिथि : महंत श्री राघवेंद्र गोस्वामी थे जबकि मुख्य वक्ता श्री गोविंदराम बसोने रहे शंकर नगर बालाजी प्रभात शाखा में भी भारत माता का पूजन और शस्त्र पूजन किया गया । यहां मुख्य अतिथि प्रदीप कुमार जैन जी और मुख्य वक्ताश्री निश्चय बाजपेई जी थे जिन्होने अपने संबोधन में संघ के योगदान को याद किया
बता दें कि संघ के पंच परिवर्तन—पर्यावरण, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने ने बताया कि डॉ. हेडगेवार ने 1925 में विजयदशमी के दिन संघ की स्थापना की थी। तब से लेकर आज तक संघ ने अनेक संघर्षों, प्रतिबंधों और आपातकाल का सामना किया है, लेकिन इसका कार्य निरंतर जारी रहा। वर्तमान में संघ के 40 से अधिक अनुषांगिक संगठन विभिन्न क्षेत्रों में समाज सेवा कर रहे हैं।

