गूंजेगा गहिरा मड़ई का शौर्य, संस्कृति और परंपरा का उत्सव

PTV BHARAT 30 JANUARY 2026  रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और योद्धा परंपरा को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ कोसरिया अहीर यादव सेवा समाज द्वारा “मंडी की देवी मड़ई (गहिरा मड़ई)” का आयोजन वर्ष 2026 में सातवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के सहयोग से 30 जनवरी 2026 को राजधानी रायपुर में आयोजित किया जाएगा।इस संबंध में आयोजन समिति द्वारा मोतीबाग स्थित मधुकर खेर स्मृति प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की गई, जहाँ समाज के पदाधिकारियों एवं संयोजकों ने गहिरा मड़ई के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।गहिरा मड़ई केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि योद्धाओं की वीरता, साहस और आत्मबल का प्रतीक है। चंडी ताल की तेज लय पर लाठी और तलवार के साथ कलाकार जिस शौर्य का प्रदर्शन करते हैं, वह छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक युद्ध परंपरा की याद दिलाता है। माना जाता है कि पुराने समय में योद्धा युद्धभूमि की ओर इसी प्रकार गाते-बजाते और ललकारते हुए जाते थे।समय के साथ गहिरा मड़ई में रास नृत्य और कथात्मक प्रस्तुतियों का भी समावेश हुआ है। राधा-कृष्ण एवं गोप-गोपियों से जुड़े संयोग-वियोग और श्रृंगार रस पर आधारित दोहों के साथ किया जाने वाला यह नृत्य दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। इसके साथ ही नीति-निर्देशक दोहे समाज को सदाचार और नैतिक मूल्यों का संदेश भी देते हैं।इस आयोजन का एक विशेष पहलू परेतीन दाई से जुड़ी लोकमान्यता है। मान्यता के अनुसार बाजार-हाट की पहली बोहनी परेतीन दाई द्वारा किए जाने से समृद्धि आती है। ग्रामीण अंचलों में आज भी नवजात शिश के दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना को लेकर यह परंपरा निभाई जाती है, लेकिन शहरीकरण के कारण यह लोक-विरासत धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है।

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