अपने देश में मनुष्य से मनुष्य का संबंध अपनेपन का है – डॉ. मोहन भागवत जी

PTV BHARAT 18 FEB 2026 गोरखपुर-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रांत की ओर से संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त तारामंडल स्थित बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न जाति, समाज और पंथ के प्रमुख व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

सामाजिक सद्भाव बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि आज सामाजिक नेतृत्व यहाँ उपस्थित है। समाज उसे कहते हैं, जिसका परस्पर जुड़ाव हो। अर्थ-स्वार्थ का अपनापन टिकता नहीं है। अन्य देशों में विचार है कि मनुष्य से मनुष्य का संबंध एक सौदा है, किन्तु अपने देश में मनुष्यों के संबंध का विचार ऐसा नहीं है। यहाँ संबंध अपनेपन का है। हमारे देश में अनेक विविधताएँ और अनेक रीति-रिवाज हैं। यहाँ विविधता में एकता है क्योंकि यहाँ एक नाता है -भारत को हम माता मानते हैं। एक ही चैतन्य सबमें है – वह भगवान है। हमारी अलग-अलग विशिष्टताओं के बावजूद यही नाता हमें जोड़े रखता है। हमारी संस्कृति में हम महिला को वात्सल्य की दृष्टि से देखते हैं। सदियों के आचरण से हमारा यह स्वभाव बना है। हमारे यहाँ अलग रंग-रूप और वेशभूषा अलगाव का कारण नहीं बनते। उन्होंने कहा कि हमारे समाज का लक्ष्य जीवन के सत्य को जानना है और जीवन का सत्य भगवान है। यही हमारा समान लक्ष्य और समान संस्कृति है। समाज सद्भाव से चलता है। समाज में यदि सद्भावना नहीं है तो कानून और पुलिस के बावजूद समाज नहीं चलता।

सरसंघचालक जी ने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे हुए हैं। यह कोई उत्सव की बात नहीं है। जिसे करने में 100 वर्ष लग गए, वह और पहले हो जाना चाहिए था। हमें करना यह है कि ब्लॉक स्तर पर वर्ष में 2-3 बार बैठें। हम अपनी जाति की चिंता कर रहे हैं, यह अच्छी बात है, लेकिन ध्यान रखें कि हम एक बड़े समाज के अंग हैं। हिन्दू समाज में पूर्ण स्वतंत्रता है। हम हिन्दू समाज के अंग हैं, इस दृष्टि से क्या कर रहे हैं और क्या कर सकते हैं, इस पर विचार करें। साथ ही अपनी जाति-समाज की बैठक में भी विचार करें कि ब्लॉक स्तर पर हम हिन्दू समाज के लिए क्या कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत स्वार्थ नहीं देखता। दुनिया के अन्य देशों पर संकट आने पर भारत उनकी सहायता के लिए आगे आता है। भारत सद्भावना का केन्द्र है।

सरसंघचालक जी के उद्बोधन के पश्चात विभिन्न जाति, पंथों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। उनकी जिज्ञासाओं पर सरसंघचालक जी ने कहा कि आवश्यक है कि अपनी जाति-बिरादरी में चर्चा कर बड़े हिन्दू समाज के लिए कार्य करें। ब्लॉक स्तर पर  बैठकों के बाद धीरे-धीरे बात आगे बढ़ेगी। समाज स्तर पर कार्य स्वयं करना होगा। संघ के भरोसे नहीं रहना चाहिए। समाज के हर अंग में शक्ति होनी चाहिए। समाज को चलाने के लिए खंड स्तर पर समाज के मुखिया लोगों को कार्य करना होगा। मिलकर विचार करेंगे, मिलकर दायित्व लेंगे और कुछ गड़बड़ होगा तो मिलकर सुधार करेंगे। देश ठीक रहेगा तो हम भी ठीक रहेंगे। यह समाज का काम है। समाज करेगा, संघ सहायता करेगा।

सामाजिक सद्भाव बैठक में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने अपने समाज में हो रहे सामाजिक कार्यों के प्रेरक उदाहरण साझा किए। इस अवसर पर सरसंघचालक जी ने विविध जाति, पंथ और समाजों के प्रतिनिधियों के साथ पंगत में भोजन किया। भारत माता की आरती के साथ सद्भावना बैठक का समापन हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *