PTV BHARAT 07 MARCH 2026 छत्तीसगढ़- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तीकरण का प्रतीक है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से महिला शक्ति, सामाजिक एकता और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां ग्रामीण महिलाओं ने अपने सामूहिक प्रयास से न केवल कुपोषण के खिलाफ लड़ाई छेड़ी है, बल्कि समाज में सहयोग, समर्पण और आत्मनिर्भरता का एक नया उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।समूहों ने उठाया स्वस्थ शिशु का जिम्मा बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम आनी में ज्योति महिला स्व-सहायता समूह और माँ शारदा स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘कोरिया मोदक’ नामक पौष्टिक लड्डू तैयार कर रही हैं, जिन्हें गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। इस अभिनव पहल से जिले में कम वजन वाले शिशुओं के जन्म की समस्या को कम करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। सामाजिक सदभाव की मिठास इस पहल की एक और खास बात यह है कि इसमें हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय की महिलाएं मिलकर काम कर रही हैं। अलग-अलग धर्म, जाति और समुदाय से आने वाली महिलाएं जब एक साथ बैठकर इन पौष्टिक लड्डुओं का निर्माण करती हैं, तो वह केवल पोषण नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश भी समाज तक पहुंचाती हैं।समस्या से समाधान तक का सफरकोरिया जिले में लंबे समय से कम वजन वाले नवजात शिशुओं के जन्म की समस्या चिंता का विषय रही है। गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त और संतुलित पोषण न मिलने के कारण माताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था और नवजात शिशुओं का जन्म वजन भी कम होता था।कम समय में असरदार व सकारात्मक परिणामइसी चुनौती से निपटने के लिए फरवरी 2025 में ‘कोरिया मोदक’ पहल की शुरुआत की गई। राज्य के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार कुपोषण उन्मूलन की दिशा में जिला प्रशासन ने विशेष प्रयास किए। जिले की कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिला खनिज न्यास निधि के माध्यम से इस अभिनव योजना को लागू किया गया। यह पहल स्थानीय संसाधनों और महिलाओं की भागीदारी पर आधारित एक ऐसा मॉडल बनकर उभरी है, जिसने कम समय में ही सकारात्मक परिणाम देना शुरू कर दिया है।मातृ पोषण को मिला नया आधारइस योजना के अंतर्गत गर्भावस्था के पांचवें माह से लेकर प्रसव तक गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन दो पौष्टिक ‘कोरिया मोदक’ लड्डू दिए जाते हैं। इन लड्डुओं को मौसम और उपलब्धता के आधार पर रागी, सत्तू, गुड़, मूंगफली, तिल, चना, जौ और घी जैसी पौष्टिक सामग्री से तैयार किया जाता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध इन खाद्य पदार्थों के उपयोग से तैयार यह लड्डू स्वादिष्ट होने के साथ-साथ आयरन, प्रोटीन और ऊर्जा का समृद्ध स्रोत बन गया है।समन्वय व संवेदनशीलता आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पोषण संगवारी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला को नियमित रूप से इन लड्डुओं का लाभ मिल सके। इसके साथ ही घर-घर जाकर महिलाओं को इनके सेवन के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है, जिससे मातृ पोषण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।
पोषण, रोजगार और सामाजिक एकता का संगम-कोरिया मोदक
