PTV BHARAT 31 MARCH 2026 छत्तीसगढ़ में धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 के पारित होने पर प्रदेश के विभिन्न समाजों द्वारा राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया जा रहा है। इसी कड़ी में संत गुरु घासीदास बाबा जी के अनुयायी सतनामी समाज ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए सरकार के प्रति अपना आभार प्रकट किया है।प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सतनामी महासभा समिति के अध्यक्ष राजमहंत डॉक्टर बसंत अंचल ने कहा कि यह विधेयक वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में एआवश्यक और दूरदर्शी कदम है, जो समाज में संतुलन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि सतनामी समाज सदैव बाबा गुरु घासीदास जी के आदर्शों—सत्य, अहिंसा, समानता और सामाजिक समरसता—का पालन करता आया है। समाज ने हमेशा से छत्तीसगढ़ की सामाजिक संरचना, परंपराओं और सांस्कृतिक निरंतरता को सहेजने का कार्य किया है, जो सामाजिक स्थिरता का आधार है।डॉक्टर बसंत अंचल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों ने कई स्थानों पर सामाजिक तनाव और विभाजन की स्थिति पैदा की है। विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इसका प्रभाव व्यापक रूप से देखने को मिला है। कई मामलों में यह आशंका जताई गई कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से न होकर प्रलोभन, दबाव या अनुचित प्रभाव के कारण किया गया, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित हुआ।उन्होंने स्पष्ट किया कि सतनामी समाज किसी भी धर्म या आस्था के विरोध में नहीं है, बल्कि भारत की मूल भावना—विविधता और सह-अस्तित्व—का सम्मान करता है। लेकिन जब कोई प्रक्रिया सामाजिक संतुलन को प्रभावित करने लगती है, तब उसके लिए स्पष्ट नियम और कानूनी व्यवस्था आवश्यक हो जाती है।उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है तथा “प्रलोभन”, “दबाव” और “अनुचित प्रभाव” जैसे तत्वों को चिन्हित कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। साथ ही पूर्व सूचना और पुष्टि की व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी व्यक्ति का आस्था परिवर्तन पूर्णतः स्वैच्छिक और निष्पक्ष हो। विधेयक में किए गए दंडात्मक प्रावधानों को समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया गया है। डॉक्टर बसंत अंचल ने कहा कि यह कानून सामाजिक समरसता को मजबूत करने और समाज में विश्वास बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगा।सतनामी समाज ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के लालच, भ्रम और अंधविश्वास से दूर रहें तथा समाज में आपसी सम्मान, संवाद और शांति बनाए रखते हुए इस अधिनियम की भावना के अनुरूप कार्य करें।

