राजनांदगांव : आपदा पूर्व चेतावनी एवं सहायता के लिए एप एवं टोल फ्री नंबर

PTV BHARAT 08 JUNE 2026- राजनांदगांव : आपदा पूर्व चेतावनी एवं सहायता के लिए एप एवं टोल फ्री नंबर- भारत सरकार द्वारा बाढ़, आकाशीय बिजली, वनीय आग, लू-तापघात सहित अन्य आपदाओं के बारे में जनसामान्य को पूर्व चेतावनी प्रदान करने के लिए सचेत, दामिनी एवं मेघदूत एप विकसित किया गया है। इसके साथ ही आपदा के समय जनसामान्य को सहायता एवं बचाव हेतु आपदा टोल फ्री नंबर 1070 व 112 जारी किया गया है। किसानों और ग्रामीणों के दो सच्चे साथी अब हमेशा उनके साथ रहेंगे। एक उन्हें मौसम संबंधी जानकारी से लैस करेगा, तो दूसरा आकाशीय बिजली की कहर से बचाएगा। छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक के साथ ही खेती-किसानी का काम-काज शुरू हो जाता है। किसान मौसम संबंधी सटीक जानकारी के लिए मेघदूत और आकाशीय बिजली से जनहानि और पशुहानि से बचाव के लिए दामिनी एप्प का सहारा ले सकते हैं।  भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने इन दोनों एप्प को लॉन्च किया है। इसे गूगल प्ले स्टोर के माध्यम से किसी भी एंड्राइड मोबाईल पर डाउनलोड किया जा सकता है। मेघदूत एप अंतर्गत कृषि कार्यों में किसानों के मार्गदर्शन हेतु विशेषज्ञ पैनल द्वारा स्थानीय स्तर पर मौसम आधारित उपयुक्त फसल सलाह दी जाती है। इसके साथ ही जिला एवं तहसील स्तर पर पशुपालन, मत्स्य पालन, जलीय कृषि, रेशम उत्पादन, मधुमक्खी पालन हेतु सलाह दी गई है। मेघदूत एप के माध्यम से आगामी 5 दिनों के लिए महत्वपूर्ण मौसम अव्यव जिनमें वर्षा, तापमान, हवा, सामेक्षित आद्र्रता एवं मेघाच्छादन के लिए मौसम पूर्वानुमान प्रदर्शित होता है, जिसमें देश के सभी जिले एवं तहसील शामिल है। खेती-किसानी के सीजन में किसानों के लिए मौसम की सटीक जानकारी आवश्यक होती है, इससे खेती-किसानी का काम-काज व्यवस्थित और सुचारू ढंग से करने में मदद मिलती है। 
    मानसून के दौरान ही आकाशीय बिजली की घटनाओं का सिलसिला शुरू हो जाता है, इसके कारण अधिक संख्या में जन एवं पशु हानि की सूचनाएं प्राप्त होती है। इन घटनाओं में कमी लाने और लोगों को सचेत करने के लिए दामिनी एप्प तैयार किया गया है। इस एप्प के माध्यम से 20 से 31 किलोमीटर के दायरे में आकाशीय बिजली का पूर्वानुमान मिल जाएगा। इससे पशुहानि और जनहानि को रोकने में मदद मिलेगी।  
ऐसे बनती है आकाशीय बिजली जब ठंडी हवा संघनित होकर बादल बनती है तब इन बादलों के अंदर गर्म हवा की गति और नीचे ठंडी हवा के होने से बादलों में धनावेश (पॉजिटिव चार्ज) ऊपर की ओर एवं ऋणावेश (निगेटिव चार्ज) नीचे की ओर होता है। बादलों में इन विपरीत आवेशों की आपसी क्रिया से विद्युत आवेश उत्पन्न होता है। इस प्रकार आकाशीय बिजली उत्पन्न होती है। फिर धरती पर पहुंचने पर आकाशीय बिजली बेहतर चालक को तलाशती हैं, जिससे वह गुजर सके। इसके लिए धातु और पेड़ उपयुक्त होते हैं। बिजली अक्सर इन्हीं माध्यमों से पृथ्वी में जाने का रास्ता चुनती है। इसलिए बरसात के दिनों में लोग बिजली के खंभों, पेड़ों और धातुओं से दूर रहना चाहिए तथा बिजली के उपकरणों का प्रयोग सावधानीपूर्वक करें। जितना हो सके आकाशीय बिजली की स्थिति में मोबाइल का उपयोग नहीं किया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *