रायपुर : “मोर गाँव मोर पानी’ अभियान को मिलेगा वैज्ञानिक आधार : एनआईटी रायपुर करेगा धमतरी और कुरूद का हाइड्रोजियोलॉजिकल सर्वे

PTV BHARAT | 23 जून 2026

“मोर गाँव मोर पानी” अभियान को मिलेगा वैज्ञानिक आधार, धमतरी और कुरूद में होगा हाइड्रोजियोलॉजिकल सर्वे

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन प्रयासों को अब वैज्ञानिक आधार मिलने जा रहा है। राज्य में संचालित “मोर गाँव मोर पानी” अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए धमतरी जिले के जल संकटग्रस्त धमतरी और कुरूद विकासखंडों में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर द्वारा विस्तृत हाइड्रोजियोलॉजिकल सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

इस अध्ययन के आधार पर भविष्य में भू-जल पुनर्भरण (ग्राउंड वाटर रिचार्ज) और जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा, जिससे जल प्रबंधन को अधिक सटीक और दीर्घकालिक दिशा मिल सके।

क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल क्षेत्रों पर फोकस

भू-जल दोहन की स्थिति को देखते हुए धमतरी विकासखंड को “क्रिटिकल” तथा कुरूद विकासखंड को “सेमी-क्रिटिकल” श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में लगातार गिरते जल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने राज्य स्तर पर विशेष प्रस्ताव भेजा था, जिसके बाद एनआईटी रायपुर की विशेषज्ञ टीम को अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

क्या होगा सर्वे में?

विशेषज्ञ टीम निम्न बिंदुओं पर विस्तृत अध्ययन करेगी—

  • विभिन्न गांवों में उपलब्ध भू-जल की वास्तविक स्थिति का आकलन
  • जल स्तर में हो रहे बदलाव का वैज्ञानिक विश्लेषण
  • मौजूदा जल स्रोतों की क्षमता का मूल्यांकन
  • वर्षा जल संरक्षण की संभावनाओं की पहचान
  • भू-जल पुनर्भरण के लिए उपयुक्त संरचनाओं का चयन
  • तकनीकी डिजाइन और प्रभाव का मूल्यांकन

इन सभी पहलुओं को शामिल करते हुए विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

दीर्घकालिक समाधान पर जोर

एनआईटी रायपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. विकास कुमार विद्यार्थी के अनुसार प्रभावी और स्थायी परिणामों के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है। संस्थान प्रस्तावित गांवों के आधार पर विस्तृत कार्ययोजना और वित्तीय आकलन तैयार कर रहा है।

मनरेगा से जुड़ेगा एक्शन प्लान

राज्य मनरेगा आयुक्त कार्यालय ने भी इस पहल में सक्रिय भूमिका निभाई है। सर्वेक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद मनरेगा (MGNREGA) तथा अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के तहत जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

विशेष ध्यान उन गांवों पर रहेगा जो हर वर्ष गर्मी के मौसम में गंभीर जल संकट का सामना करते हैं।

जल आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

“मोर गाँव मोर पानी” अभियान का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण, भू-जल स्तर में सुधार और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

एनआईटी रायपुर के तकनीकी सहयोग से बनने वाली जल संरचनाएं अधिक प्रभावी और टिकाऊ होंगी। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और गांवों को जल-आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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