PTV BHARAT 3 JULY 2026 रायपुर : बंदूक छोड़ी, सम्मान पाया : आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम नुरेटी का पक्का आशियाना हुआ साकार – हिंसा की राह छोड़ जब कोई मुख्यधारा में लौटता है, तो न सिर्फ एक जीवन सुधरता है बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा मिलती है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के ग्राम पंचायत कोहकामेटा निवासी कमलू राम नुरेटी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी नक्सल संगठन की कड़ियों में उलझे कमलू राम ने वर्ष 2013 में आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का बड़ा फैसला किया। आज वे न केवल स्वयं सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।
भटके हुओं को दिखाई राह, शासन ने दिया सहारा
आत्मसमर्पण के बाद कमलू राम ने समाजहित को सर्वोपरि माना। उन्होंने न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि अन्य नक्सल प्रभावित युवाओं को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित किया। उनके इसी सकारात्मक बदलाव और सामाजिक योगदान को देखते हुए राज्य शासन की पुनर्वास योजनाओं का लाभ उन्हें प्रदान किया गया, जिससे उनके वर्षों पुराने पक्के घर का सपना साकार हो सका।
योजनाओं के समन्वय से तैयार हुआ सपनों का घर
कमलू राम को मुख्यधारा में पूरी तरह स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास किए गए। वर्ष 2024-25 में विशेष परियोजना के अंतर्गत ‘आत्मसमर्पित नक्सल पीड़ित योजना’ के तहत उनका सर्वेक्षण किया गया, जिसके बाद उन्हें प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 1.20 लाख रुपये की लागत से पक्का आवास स्वीकृत हुआ।
आवास निर्माण के दौरान उन्हें मनरेगा (वीबी-जी राम जी) के माध्यम से 23 हजार 490 रुपये की मजदूरी भी प्रदान की गई, जिससे निर्माण कार्य में आर्थिक सहायता मिली। नए आशियाने के साथ उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय तथा सौभाग्य योजना के माध्यम से बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराया गया।
मिला सम्मानजनक जीवन
कमलू राम नुरेटी ने बताया कि पहले वे परिवार के साथ किराये के मकान में रहते थे, जहाँ हर दिन नई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब पक्का घर, बिजली और शौचालय मिलने से पूरा परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहा है।
पुनर्वास योजनाएं ला रही हैं क्षेत्र में बदलाव
जिला प्रशासन का मानना है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए संचालित योजनाएं धरातल पर सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। कमलू राम नुरेटी की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं और समाज के सहयोग से किसी भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यह पहल बस्तर और आसपास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और विश्वास को मजबूत कर रही है।

