PTV BHARAT 11 AUGUST 2026 रायपुर। छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल के बेटे वैभव पन्नालाल की फर्म फर्स्ट हाउस, रायपुर के माध्यम से सरकारी मशीनों की कथित खरीद-सप्लाई में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता नितिन लॉरेंस ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में शिकायत देकर मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। शिकायत 10 अगस्त 2026 को प्रस्तुत की गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान फर्स्ट हाउस के माध्यम से बड़ी मात्रा में मशीनों की सरकारी सप्लाई की गई। शिकायत में ऑनलाइन उपलब्ध कीमतों और कथित सरकारी खरीद कीमतों के बीच अंतर का हवाला देते हुए शासन को 1 से 2 करोड़ रुपये अथवा उससे अधिक की संभावित आर्थिक क्षति की आशंका जताई गई है।
शिकायत में Hydraulic Wax Press, Wood Splitting Machine, Scrap Baling Press, Hydraulic Shearing Machine, PET Baling Press और Hydraulic Wax Press-SRH-18 सहित अन्य मशीनों की खरीद की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने संबंधित मशीनों की वास्तविक बाजार कीमत का स्वतंत्र तकनीकी एवं बाजार मूल्यांकन कराने का आग्रह किया है।
टेंडर और सरकारी खरीद प्रक्रिया की जांच की मांग
नितिन लॉरेंस ने EOW-ACB से यह जांचने की मांग की है कि संबंधित मशीनें किस सरकारी विभाग अथवा योजना के तहत खरीदी गईं, टेंडर जारी हुआ था या नहीं, GeM के माध्यम से खरीद हुई या नहीं, कितने बोलीदाता शामिल हुए और तकनीकी मूल्यांकन, Comparative Statement तथा Purchase Committee की प्रक्रिया किस तरह पूरी की गई।
शिकायत में Purchase Order, Invoice, GST, E-Way Bill, मशीनों की वास्तविक डिलीवरी, Installation तथा सरकार द्वारा किए गए भुगतान की भी जांच की मांग की गई है।
फर्स्ट हाउस और बैंक खातों की जांच
शिकायतकर्ता ने फर्स्ट हाउस के GST Registration, PAN, फर्म रजिस्ट्रेशन, Proprietorship/Partnership Details, Directors/Partners, Sales और Purchase Invoices, GST Returns, Income Tax Records तथा बैंक खातों की जांच की मांग की है। इसके साथ ही सरकारी भुगतान के बाद रकम किन खातों में गई, संबंधित व्यक्तियों के बीच कोई लेन-देन हुआ या नहीं, इसकी Money Trail जांचने का अनुरोध किया गया है।
शिकायत में अरुण पन्नालाल के पुत्र अथवा उनसे संबंधित व्यक्तियों और फर्मों की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है। शिकायतकर्ता ने यह पता लगाने का आग्रह किया है कि संबंधित सप्लायर का मालिक, डायरेक्टर अथवा पार्टनर कौन है और उसका अरुण पन्नालाल से क्या संबंध है।
अधिकारियों से संभावित मिलीभगत की जांच
शिकायत में सरकारी अधिकारियों और सप्लायर के बीच संभावित मिलीभगत की जांच की मांग भी की गई है। इसमें किसी विशेष सप्लायर को लाभ पहुंचाने के लिए inflated specification तैयार करने, प्रतिस्पर्धा सीमित करने, गलत Comparative Statement बनाने, Market Verification नहीं करने, अधिक कीमत मंजूर करने या उचित सत्यापन के बिना भुगतान करने जैसे संभावित मामलों की जांच का आग्रह किया गया है।
शिकायतकर्ता ने फर्जी quotation, invoice, forged document अथवा electronic record सामने आने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।
धर्मांतरण और विदेशों में कथित भ्रामक जानकारी देने का आरोप
नितिन लॉरेंस ने शिकायत में अरुण पन्नालाल पर धर्मांतरण से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, अरुण पन्नालाल द्वारा धर्मांतरण एवं भारत से संबंधित विषयों पर विदेशों में कथित रूप से गलत अथवा भ्रामक जानकारी दिए जाने की भी जांच की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि जांच में ऐसे आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इस पहलू को मशीनों की खरीद से जुड़े आर्थिक अपराध से तभी जोड़ा जाए, जब जांच में दोनों के बीच वास्तविक आपराधिक या वित्तीय संबंध सामने आए।
विदेशी फंडिंग और राजनीतिक संबंधों की भी जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने अरुण पन्नालाल के बेटे अथवा संबंधित खातों में कथित विदेशी फंडिंग की भी जांच की मांग की है। साथ ही यह पता लगाने का अनुरोध किया गया है कि अरुण पन्नालाल के प्रदेश के किन-किन राजनीतिक व्यक्तियों से संबंध हैं और क्या इन संबंधों का सरकारी सप्लाई या अन्य गतिविधियों से कोई संबंध है।
नितिन लॉरेंस ने EOW-ACB से संबंधित सरकारी खरीद के मूल रिकॉर्ड सुरक्षित कराने, Tender और GeM रिकॉर्ड प्राप्त करने, सभी quotations एवं comparative statements की जांच करने, Purchase Orders और original invoices का सत्यापन करने तथा सरकार को हुई वास्तविक आर्थिक क्षति निर्धारित करने की मांग की है। शिकायत में जांच के दौरान अपराध के तथ्य सामने आने पर FIR दर्ज कर कार्रवाई करने का भी अनुरोध किया गया है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं। इनकी स्वतंत्र जांच और पुष्टि होना अभी बाकी है।

