रायपुर : इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा : वन मंत्री केदार कश्यप

PTV BHARAT 11 AUGUST 2026 – रायपुर : इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा : वन मंत्री केदार कश्यप – बस्तर के दरभा क्षेत्र में तीन दिवसीय हरेली बर्ड फेस्टिवल का भव्य शुभारंभ वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मुख्य आतिथ्य में हुआ। उन्होंने कहा कि बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता के कारण देश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल होने की क्षमता रखता है।

बस्तर के वनों में कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह आयोजन पक्षी संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देगा। उन्होंने बताया कि बस्तर के वनों में कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं और उनका संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हरेली बर्ड फेस्टिवल से इको-टूरिज्म को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को बर्ड गाइड, होम-स्टे, पर्यटन सेवाओं और प्रकृति आधारित आजीविका के क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने ग्रामीणों से वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा में वन विभाग का सहयोग करने की अपील की।

‘गज संकेत’ मोबाइल ऐप किया लॉन्च

कार्यक्रम के दौरान वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहल की गईं। हरेली बर्ड फेस्टिवल का आधिकारिक लोगो जारी किया गया और मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के उद्देश्य से ‘गज संकेत’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया। साथ ही बस्तर की प्राकृतिक विरासत पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक और अन्य प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी बस्तर पहाड़ी मैना के संरक्षण पर विशेष प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर राज मोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत जून 2026 तक 1,233 हितग्राहियों को 17 करोड़ 9 लाख रुपये की सहायता राशि के वितरण की शुरुआत की गई।

कार्यक्रम के दौरान वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले हाथी मित्र दल, मैना मित्र दल और गिद्ध मित्र दल के सदस्यों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर विधायक विनायक गोयल, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, अपर मुख्य सचिव वन मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे, जगदलपुर महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पर्यावरणविद, ग्रामीण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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