PTV BHARAT 01 OCTOBER 2026 – रायपुर : छत्तीसगढ़ की पुरातात्विक धरोहरों में बढ़ेंगी पर्यटक सुविधाएं – छत्तीसगढ़ की पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI), भारत सरकार और संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ। इसके तहत प्रदेश के संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं एवं अधोसंरचना का सुनियोजित विकास किया जाएगा।
समझौते के तहत छत्तीसगढ़ शासन, ASI अधिकारियों के परामर्श से संरक्षणाधीन स्मारकों एवं पुरातात्विक स्थलों के लिए पर्यटक सुविधाओं के विकास की योजनाएं तैयार करेगा। इन योजनाओं का उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उनके पर्यटन अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
शौचालय से सूचना केंद्र तक विकसित होंगी सुविधाएं – प्रस्तावित सुविधाओं में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग और क्लॉक रूम के साथ सूचना केंद्र, साइट म्यूजियम और साइनेज शामिल होंगे। समावेशी पर्यटन को ध्यान में रखते हुए ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे भी विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा लैंडस्केपिंग सहित पर्यटकों की जरूरत के अनुरूप अन्य अधोसंरचना विकसित की जा सकेगी।
पुरातात्विक धरोहरों की मौलिकता रहेगी सर्वोपरि – विकास कार्यों के दौरान ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्मारकों के मूल स्वरूप और मौलिकता को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। डिजाइन, निर्माण सामग्री और संरचना इस प्रकार तय की जाएगी कि स्मारकों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। सभी कार्य पुरातत्त्वीय अधिनियमों एवं नियमों के अनुरूप होंगे और ASI की स्वीकृति के बाद ही परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा।
केंद्र, राज्य, CSR और PPP से जुटेंगे संसाधन – पर्यटक सुविधाओं और अधोसंरचना विकास के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ राज्य शासन की एजेंसियों, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के माध्यम से संसाधन जुटाए जा सकेंगे। विकसित सुविधाओं के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन या शासन द्वारा अधिकृत एजेंसी की होगी।
योजना एवं क्रियान्वयन समिति करेगी निगरानी – विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सतत निगरानी के लिए ‘योजना एवं क्रियान्वयन समिति’ का गठन किया जाएगा। समिति परियोजनाओं की योजना, विकास और प्रबंधन से जुड़े विभिन्न चरणों की निगरानी करेगी, जिससे संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
विरासत पर्यटन को मिलेगी नई दिशा – MoU से प्रदेश की पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के साथ पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और विरासत पर्यटन के समन्वित विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को पर्यटन के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाने में सहायता मिलेगी।
MoU के अवसर पर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के महानिदेशक के प्रतिनिधि के रूप में मध्य क्षेत्र के निदेशक डॉ. टी. अरुण राज और रायपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. एम. कलिमुथु उपस्थित रहे। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने छत्तीसगढ़ शासन की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। संचालक पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय डॉ. संजय कन्नौजे सहित विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।

