PTV BHARAT 09 OCTOBER 2026 – सरगुजा : विशेष लेख : पशुपालन और मछली पालन से बदल रही किसानों की तकदीर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती – छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी के साथ पशुपालन, डेयरी व्यवसाय और मछली पालन आय के नए स्रोत बन रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रहा है। सरगुजा जिले में डेयरी उद्यमिता विकास योजना, सूकर प्रदाय योजना और ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण एवं गहरीकरण से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर मिल रहे हैं।
डेयरी व्यवसाय से संध्या को प्रतिमाह 15 हजार रुपये की बचत – सरगुजा जिले के ग्राम लमगांव निवासी संध्या ने वर्ष 2024 में राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत मिले अनुदान से डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनकी डेयरी से प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध की बिक्री से उन्हें प्रतिदिन करीब 1,200 रुपये की आय प्राप्त होती है। पशुओं के चारे, पानी और अन्य आवश्यक खर्चों के बाद वे प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये की बचत कर रही हैं। उनकी वार्षिक बचत करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रही है।
संध्या डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रयासरत हैं। गायों से प्राप्त तीन बछियों को भविष्य में प्रजनन के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे पशुधन और दुग्ध उत्पादन बढ़ने की संभावना है। उनकी सफलता दर्शाती है कि शासकीय सहायता और निरंतर मेहनत से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
दो कमरों से शुरू किया सूकर पालन, अनिल कुमार ने बनाया स्वरोजगार का आधार – ग्राम शिवनाथपुर निवासी अनिल कुमार खेस ने वर्ष 2018 में पशुधन विकास विभाग की सूकर प्रदाय योजना के तहत मिली सहायता से दो कमरों में सूकर पालन शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत, अनुभव और विभागीय मार्गदर्शन से इस व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
अनिल कुमार ने उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग करते हुए पशुओं की देखभाल और व्यवसाय के संचालन पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे सूकर पालन उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया। उनका अनुभव बताता है कि सही योजना, तकनीकी जानकारी और निरंतर प्रयास से छोटे स्तर पर शुरू किया गया व्यवसाय भी आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है।
आजीविका डबरी से बाबूनाथ को सिंचाई और मछली पालन का अवसर – अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो निवासी किसान बाबूनाथ के लिए ग्रामीण रोजगार योजना के तहत डबरी का गहरीकरण और मरम्मत उपयोगी साबित हुई है। डबरी की जल संग्रहण क्षमता बढ़ने से खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे साग-सब्जियों की खेती करना आसान हुआ है और भूमि का बेहतर उपयोग संभव हुआ है।
पहले सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता चुनौती थी। अब सब्जी उत्पादन से परिवार की घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ अतिरिक्त उपज बाजार में बेचकर आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। बाबूनाथ ने डबरी में मछली बीज भी डाला है, जिससे खेती के साथ मत्स्य पालन का विकल्प विकसित हुआ है। उनका कहना है कि डबरी में पानी उपलब्ध होने से खेती में सुविधा हुई है और मछली पालन से भी अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद है।
अनुपयोगी जमीन बनी आजीविका का साधन, सनी लाल ने अपनाई सब्जी की खेती और मछली पालन – ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरी से किसान सनी लाल को भी लाभ मिला है। पहले उनकी जमीन का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा था। डबरी निर्माण से वर्षा जल संग्रहण की सुविधा विकसित हुई, जिससे खेती और मछली पालन के नए अवसर मिले।
अब सनी लाल डबरी में मछली पालन कर रहे हैं और आसपास की जमीन पर साग-भाजी उगा रहे हैं। सब्जी उत्पादन से परिवार की घरेलू जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है। वहीं, मछलियों के तैयार होने पर उन्हें बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने की उम्मीद है। सनी लाल के अनुसार, डबरी बनने से पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है और खेती करना आसान हो गया है।
यह पहल दर्शाती है कि जल संरक्षण के साथ आजीविका गतिविधियों को जोड़कर किसानों के लिए आर्थिक प्रगति के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
शासकीय योजनाओं से ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन – राज्य शासन द्वारा कृषि के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को डेयरी व्यवसाय के लिए अनुदान आधारित सहायता दी जा रही है। पशुधन विकास विभाग की योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, ग्रामीण रोजगार योजना के तहत डबरी निर्माण एवं गहरीकरण से जल संरक्षण, सिंचाई और मत्स्य पालन की संभावनाओं को बढ़ावा मिल रहा है।
इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवार अपनी स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध भूमि, जल संसाधनों और क्षमता के अनुरूप आजीविका के साधन विकसित कर सकते हैं। डेयरी से नियमित आय, सूकर पालन से स्वरोजगार और डबरी आधारित खेती तथा मछली पालन से अतिरिक्त आमदनी की संभावनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।
जल संरक्षण और पशुधन आधारित आजीविका से आत्मनिर्भरता की ओर – सरगुजा जिले की संध्या, अनिल कुमार खेस, बाबूनाथ और सनी लाल की कहानियां बताती हैं कि शासकीय योजनाओं का लाभ, तकनीकी मार्गदर्शन और हितग्राहियों की मेहनत ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डेयरी और सूकर पालन ग्रामीण परिवारों को पशुधन आधारित उद्यमिता से जोड़ रहे हैं, जबकि आजीविका डबरियां जल संरक्षण के साथ सब्जी उत्पादन और मत्स्य पालन के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। इससे किसानों को भूमि और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल रही है। खेती के साथ इन गतिविधियों का विस्तार ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

