PTV BHARAT 14 OCTOBER 2026 – कोरिया : संघर्ष से सफलता तक का सफर, बिहान की मदद से आत्मनिर्भर बनीं सुनीता साहू
महिलाएं यदि ठान लें, तो कुछ भी हासिल कर सकती हैं। कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के ग्राम कर्री की सुनीता साहू ने अपने संघर्ष और मेहनत से इस बात को साबित किया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। एक छोटी-सी किराना दुकान से शुरू हुआ उनका सफर आज किराना दुकान, मनिहारी, सिलाई सेंटर और बकरी पालन जैसे व्यवसायों तक पहुंच चुका है। इन गतिविधियों से वे परिवार के खर्च पूरे करने के साथ अच्छी बचत भी कर रही हैं।
ग्राम पंचायत सलगंवाकला के आश्रित गांव कर्री निवासी सुनीता साहू किसान परिवार से हैं। उनके पति बसंतलाल के साथ उन्होंने आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू किया। आज सुनीता ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन गई हैं।
सिलाई से शुरू हुआ आगे बढ़ने का सफर
सुनीता साहू पहले अपने पति के साथ सिलाई का काम करती थीं। इसी से परिवार की आजीविका चलती थी, लेकिन सीमित आय के कारण आर्थिक जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था।
ऐसे समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत जय मां ईश्वरी स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें विभिन्न चरणों में डेढ़ लाख रुपये की ऋण सहायता मिली। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपनी आजीविका गतिविधियों का विस्तार करने में किया।
किराना दुकान, मनिहारी, सिलाई सेंटर और बकरी पालन से बढ़ी आय
सुनीता ने अपने पति के साथ सिलाई का काम जारी रखते हुए बिहान से मिली सहायता के जरिए किराना एवं मनिहारी दुकान शुरू की। दुकान का व्यवस्थित संचालन करने के साथ उन्होंने अतिरिक्त आय के लिए बकरी पालन को भी व्यावसायिक स्तर पर अपनाया।
आज वे किराना दुकान, मनिहारी, सिलाई सेंटर और बकरी पालन जैसी आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। इन प्रयासों से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और आय के कई स्रोत विकसित हुए हैं।
मेहनत से बनीं ‘लखपति दीदी’
सुनीता साहू अपनी लगन, कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग से लगातार आगे बढ़ रही हैं। वे कहती हैं कि संघर्ष के दौर में बिहान योजना से मिली मदद ने उन्हें व्यवसायी बनने का अवसर दिया। अब उनकी आजीविका गतिविधियों से हर महीने 25 से 30 हजार रुपये तक की बचत हो जाती है।
बिहान योजना से प्राप्त वित्तीय सहयोग और अपने निरंतर प्रयासों के बल पर सुनीता ने न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी अलग पहचान भी बनाई है। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है कि सही अवसर, मेहनत और दृढ़ संकल्प से आत्मनिर्भरता की राह बनाई जा सकती है।

