PTV BHARAT 16 OCTOBER 2026 – गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : महज 900 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन, दो माह के उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी
छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहां जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे महज 900 ग्राम वजन के नवजात शिशु को चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगभग दो माह तक लगातार उपचार एवं विशेष देखभाल प्रदान कर नया जीवन दिया। समय से पूर्व जन्म, अत्यंत कम वजन, सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया जैसी जटिलताओं से जूझ रहे इस नवजात का सफल उपचार जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सकीय टीम के समर्पण का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात का सफल उपचार इसी दिशा में एक उल्लेखनीय उदाहरण है।
महज 900 ग्राम वजन के साथ जिंदगी की जंग लड़ रहा था नवजात
गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी गोमती के नवजात शिशु का जन्म समय से पूर्व हुआ था। जन्म के बाद उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। इसके साथ ही उसे सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या भी थी। अत्यंत कम वजन और नाजुक स्थिति के कारण शिशु को विशेष चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार की आवश्यकता थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिशु को जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल उपचार शुरू किया। शिशु के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की गई तथा उसकी चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपचार और पोषण संबंधी देखभाल सुनिश्चित की गई।
दो सप्ताह ऑक्सीजन सपोर्ट, दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया
उपचार के दौरान सांस लेने में परेशानी के कारण नवजात को लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। गंभीर एनीमिया की स्थिति में दो यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। इसके अतिरिक्त शिशु के शरीर का तापमान संतुलित रखने, पोषण सुनिश्चित करने और वजन बढ़ाने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी), नियमित फीडिंग तथा अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी में लगभग दो माह तक चले उपचार से शिशु के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ। उसका वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने पर 8 अक्टूबर 2026 को शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
दूरस्थ वनांचल के परिवार के लिए जिला अस्पताल बना जीवनरक्षक सहारा
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे वनांचल बहुल जिले में गंभीर रूप से बीमार नवजात का जिला स्तर पर सफल उपचार होना महत्वपूर्ण है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों के लिए गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना आवश्यक है।
जिला चिकित्सालय में उपलब्ध विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों की निरंतर निगरानी, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं और आवश्यक उपचार सुविधाओं से नवजात के स्वास्थ्य में सुधार संभव हो सका। यह उपलब्धि दर्शाती है कि जिला स्तर पर नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल की सुविधाएं गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण, आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और शासकीय अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने को प्राथमिकता

