प्रदेश के 16000 कोटवारों का 23 अक्टूबर को होगा प्रांतव्यापी जिला स्तरीय धरना प्रदर्शन

PTV BHARAT 22 OCTOBER 2026 संघ के आव्हान पर प्रदेश के 16000 कोटवार अपने-अपने जिला मुख्यालय में उपस्थित होकर अपने मांगों के समर्थन में एक दिवसीय धरना आंदोलन करेंगे। विगत कई वर्षों से प्रदेश के कोटवार अपनी लम्बित मांगों की पूर्ति हेतु लगातार संघर्ष करते हुए शासन का ध्यान आकर्षित कराते आ रहे हैं । कोटवारों को बाध्य होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। कोटवार का पद आजादी के पूर्व से अनवरत जारी है और वर्तमान में भी अनेक प्रकार से शोषण का शिकार होने के बाद भी प्रदेश के कोटवार पुरी इमानदारी व निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते आ रहे हैं। परन्तु दुर्भाग्यवश अभी तक कोटवारों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं है जिसके कारण कोटवारों की स्थिति बहुत ही दयनीय बनी हुई है तथा नाम मात्र की पारिश्रमिक में भी गुजारा करने मजबुर हैं।यह आन्दोलन का दूसरा चरण है जिसमें मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। पहले चरण में 3 जुलाई 2026 को कोटवारों ने तहसील स्तर पर धरना प्रदर्शन कर तहसीलदारों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा था। तीन माह बीतने के बाद भी शासन द्वारा कोटवारों के हित में कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है जिसके कारण कोटवारों को बाध्य होकर दूसरे चरण का आन्दोलन करना पड़ रहा है।प्रमुख मांगे(1) कोटवारों को नियमित करते हुए उनका राजस्व विभाग में संविलियन किया जावे।पीढ़ी दर पीढ़ी शासन एवं आम जनता की सेवा करने तथा शासन के हर जन कल्याणकारी योजनाओं को ग्रामीण स्तर पर प्रभावशाली ढंग से लागू करवाने में अहम भूमिका निभाने के बाद भी आज तक कोटवारों को नियमित कर्मचारी का दर्जा प्राप्त नहीं है इसके कारण जीवन पर्यन्त सेवा करने के बाद भी बीमा, पेंशन, ग्रेजविटी जैसे शासन के किसी भी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता।अतः कोटवारों को नियमित करते हुए करते हुए उन्हें राजस्व विभाग में सविलियन कर दिया जाए ताकि वृद्धावस्था में कोटवारों को दर दर की ठोकरें न खानी पड़े।(2) कोटवारों के पारिश्रमिक में (महंगाई के अनुपात में) वृद्धि करते हुए कम से कम 15000/-रूपये मासिक किया जावे।कोटवारों को चार वर्गों में बांट कर उनके पारिश्रमिक का निर्धारण करना अव्यावहारिक एवं विसंगतिपूर्ण व्यवस्था है जबकि सभी कोटवारों की सेवाएं समान रूप से ली जाती है अतः कोटवारों को एक ही वर्ग में रखते हुए उन्हें सम्मानजनक पारिश्रमिक भुगतान किया जाए जिसमें कम से कम 15000/-₹ मासिक हो। कोटवार नियुक्ति में मनमानी करते हुए गैर वंशज सदस्यों को नियुक्ति देने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाते हुए कोटवारों के परिवार के सदस्यों को ही कोटवार पद नियुक्त किया जाये।आजादी के पूर्व से ही यह परम्परागत रूप से यह व्यवस्था रही है कि कोटवारों के रिक्त पद पर निवृतमान कोटवार के परिवार के सदस्यों को ही कोटवार पद पर नियुक्ति दी जाती रही है, इस प्रक्रिया को जटील बना दिया गया है।पूर्व में इसके लिए न तो ईश्तहार जारी किया जाता था और न पंचायत के प्रस्ताव कीआवश्यकता होती थी परन्तु वर्तमान में राजस्व अधिकारियों द्वारा मनमानी करते हुए स्वार्थवश या राजनीतिक दबाव में आकर किसी को भी कोटवार नियुक्त कर दिया जा रहा है जिसके कारण कोटवारों के परिवार के सदस्यों को अनावश्यक रूप से न्यायालयीन प्रक्रियाओं में उलझकर दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।

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