अम्बिकापुर : सब्जियों की खेती से रुकमनिया बनीं लखपति दीदी, तीन लाख रुपये तक पहुंची सालाना आमदनी

PTV BHARAT 5 NOVEMBER 2026- अम्बिकापुर : सब्जियों की खेती से रुकमनिया बनीं लखपति दीदी, तीन लाख रुपये तक पहुंची सालाना आमदनी

स्व-सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आजीविका के नए साधन विकसित करने के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन की जनहितैषी योजनाओं और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जुड़ने तथा आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के अवसर मिल रहे हैं।

सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत दमोहकुड़ की रुकमनिया ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से सफलता की मिसाल पेश की है। कभी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली रुकमनिया आज सब्जियों की खेती से तीन लाख रुपये तक की आमदनी अर्जित कर लखपति दीदी के रूप में पहचान बना रही हैं।

आर्थिक निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक का सफर

गुलाब महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष मुना रुकमनिया के जीवन में बिहान योजना से जुड़ने के बाद सकारात्मक बदलाव आया। पहले वे मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती थीं। सीमित आय के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

समूह से जुड़ने के बाद उन्हें 50 हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने तीन एकड़ भूमि पर सब्जियों की खेती शुरू की। वर्तमान में वे खीरा, टमाटर, मटर, गोभी, मिर्च और करेला सहित विभिन्न सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं। उनकी मेहनत से खेती के जरिए तीन लाख रुपये तक की आमदनी हुई। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ आजीविका संबंधी निर्णय स्वयं लेने का उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

समूह के सहयोग से मिली नई पहचान

रुकमनिया बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता के साथ अन्य महिलाओं का सहयोग और मार्गदर्शन भी मिला। समूह की सदस्य समय-समय पर खेती के बेहतर तरीकों की जानकारी देती हैं। इन सुझावों को अपनाकर वे अपनी खेती को आगे बढ़ा रही हैं। सामूहिक सहयोग और मेहनत के बल पर उन्होंने लखपति दीदी के रूप में पहचान बनाई है।

10-12 हजार रुपये की आमदनी जुटाना था मुश्किल

रुकमनिया के अनुसार, पहले 10 से 12 हजार रुपये की आमदनी जुटाना भी मुश्किल था। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण बड़े स्तर पर खेती करने की कल्पना भी नहीं कर पाती थीं। शासन से मिली सहायता के बाद अब वे अपनी खेती संभाल रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की मदद से ही वे आगे बढ़ सकी हैं। लखपति दीदी बनने पर उन्हें खुशी और गर्व महसूस हो रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहीं महिलाएं

रुकमनिया की सफलता ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की बदलती तस्वीर को दर्शाती है। आज ग्रामीण महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ स्वयं आय अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। उनकी यह उपलब्धि अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा है।

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