मई दिवस पर संयुक्त ट्रेड यूनियन कौंसिल की निकलेगी रैली

PYV BHARAT प्रत्येक वर्ष की तरह संयुक्त ट्रेड यूनियन कौंसिल शाम 5.30 बजे अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर मोतीबाग से रैली आयोजित करेगी । उल्लेखनीय है कि
1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो शहर के फेक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों ने 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे जिनके लिए श्रम करते हैं याने अपने परिवार को देने का अधिकार दिया जाय की मांग को लेकर हडताल कर हे मार्केट स्क्वेयर पर सभा की , इससे मालिक बैचेन हो गये . सभा के दौरान मालिकों के भाड़े के गुंडों ने भीड़ पर एक बम फ़ेंक दिया और फिर पुलिस गोलीबारी शुरू हो गई, कई मजदुर साथियों की इसमें मौत हो गई . इसके खिलाफ 4 मई को मजदूरों ने दुबारा वहां विरोध सभा की, इस पर पुलिस ने दुबारा हमला बोल दिया, इस बीच मालिकों के गुर्गों ने पुनः एक बम फ़ेंक दिया, पुलिस गोलीबारी में 4 मजदुर साथी और 6 पुलिस वालों की जानें गई और फिर उसके आड़ में श्रमिकों के संघर्ष को कुचलने अमानवीय दमन का कुचक्र चलाया गया वह अकल्पनीय है. श्रमिको के नायक आगस्ट स्पाईज, अल्बर्ट पार्सन्स, एडोल्फ फिशर, जार्ज एंगेल्स को न्यायिक प्रहसन के जरिये फांसी पर चढ़ा दिया गया. एक और मजदुर नेता लुईस लिंग्ज एक रात पहले अपनी काल कोठरी में मृत पाए गए . जब उन्हें फांसी के लिए ले जाया जा रहा था तब अगस्त स्पाईज ने कहा था , “ आज तुम जिस आवाज का गला घोंट रहे हो एक दिन ऐसा आयेगा जब हमारी यह ख़ामोशी सारी आवाजों से अधिक मुखर होगी” . मजूदर आन्दोलन पर इस निर्मम दमन पूंजीवाद के अमानवीयता के खिलाफ समूचे विश्व में विरोध के स्वर गूंजने लगे और कुछ ही सालों में इसने पूंजीवाद के विरुद्ध अन्तर्राष्ट्रीय दिवस का स्वरुप ले लिया जिसमे शिकागो के अमर बलिदानियों के रक्तिम बलिदान के लाल परचम के साथ श्रमिक वर्ग एक बेहतर दुनिया के लिए अपने संकल्प को उद्घोषित करने लगे
मई दिवस आज के मौजूदा दौर में पूरी दुनिया और भारत में श्रमिक वर्ग पर हो रहे तीखे आक्रमणों के चलते पहले से कहीं अधिंक प्रासंगिक हो गया है. अमरीका के टैरिफ युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नई व दीर्घकालीन मंदी के संकेत दिये है। जिसके असर का भार हमेशा की तरह अंततः पुनः मेहनतकश जनता पर ही थोपा जायेगा .
आज की केंद्र सरकार कठिन संघर्षों से हासिल किये गये 8 घंटे के कार्य दिवस के अधिकार पर ही सबसे नग्न हमले कर रही है . मजदूरों के भारी विरोध के बावजूद उसने 44 से अधिक श्रम कानूनों को श्रम संहिता में बदल दिया और देश के श्रमिकों को निर्लज्ज्लता के साथ मालिकों के गुलाम बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रही है . वह संविधान, जनतंत्र व नागरिक अधिकार सब पर हमले कर विरोध के हर स्वर को ही कुचलने का उपक्रम कर रही है। एक देश एक चुनाव, श्रम संहिताओं को लादने की कोशिश, सभी स्वायत्त संस्था ईडी, सीबीआई, चुनाव आयोग, न्यायपालिका सहित सारी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता समाप्त करने के उसके दुष्चक्र संविधान के बुनियादी आधार को ही कमजोर करने का प्रयास है. अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत के चरम एजेंडे के उनके प्रयासों ने मजदूर वर्ग और देश की एकता के समक्ष ही गंभीर खतरे पैदा किये हैं. पहलगाम की आतंकी हिंसा का भी वह साम्प्रदायिकरण करने में लगी है जबकि दोषी फिर वे चाहे किसी भी मजहब के हों क्योंकि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता, जिन्होंने भी ऐसी नृशंस हिंसा की वे पूरे इंसानियत के दुश्मन हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले और दुबारा ऐसी घटना न हो यह सुनिश्चित किया जाय. आर्थिक मोर्चे पर सार्वजनिक क्षेत्र की बर्बादी व निजीकरण का खेल जारी है। समूचे देश को चंद कार्पोरेट घरानों के हाथों बेच देने की उसकी मुहिम और तेज हुई है।
बीमा उद्योग में राष्ट्रीयकृत बीमा कंपनियों को कमजोर कर निजी देशी-विदेशी बीमा कंपनियों को प्रश्रय देने सरकार समग्र बीमा कानून संशोधन विधेयक लाने जा रही है। भारत के श्रमिक वर्ग ने 20 मई को इसलिए पूरे देश में केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों में बदलाव और श्रम संहिता रद्द करने की मांग को लेकर एक दिन की हड़ताल का निर्णय लिया है। देश के किसानों ने भी इस आन्दोलन के साथ एकता का इजहार किया है . एस टी यू सी ने सभी श्रमिक साथियों से इस रैली को सफल बनाने की अपील की है ।

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