PTV BHARAT 19 MAY 2025 एजेंसी नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम में आश्रित मुआवजा पाने के अधिकार पर अपने एक अहम फैसले में कहा है कि विवाहित पुत्री मोटर वेहिकल एक्ट के तहत आश्रित मुआवजा पाने की पात्र नहीं है, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि वह मरने वाले पर आर्थिक रूप से निर्भर थी। हालांकि, कोर्ट ने माना है कि विवाहित बेटी को कानूनी प्रतिनिधि के रूप में विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही, कोर्ट ने दुर्घटना में मां की मौत होने पर विवाहित बेटी का मुआवजा घटाकर 50000 रुपये करने और उसे आश्रित न मानने के हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने बूढ़ी मां का मुआवजा दावा खारिज करने का हाई कोर्ट का आदेश रद कर दिया है और मां को मुआवजा देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता की देखभाल के बारे में कहा है कि बूढ़े माता-पिता की देखभाल बच्चों के लिए वैसा ही कर्तव्य है जैसे नाबालिगों की देखभाल करना माता-पिता का दायित्व होता है। सुप्रीम कोर्ट ने बूढ़ी मां के मुआवजे के दावे को न सिर्फ स्वीकार किया, बल्कि मुआवजे की कुल रकम भी 15,97,000 बढ़ा कर 19,22,356 रुपये कर दी। इस मामले में 55 वर्षीय महिला पारस शर्मा की 26 जनवरी, 2008 को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसकी विवाहित बेटी और साथ रह रही बूढ़ी मां दोनों ने मुआवजा दावा दाखिल किया था।
‘विवाहित बेटी ‘आश्रित मुआवजे’ की पात्र नहीं-सुप्रीम कोर्ट
