संयुक्त राष्ट्र में भारत ने ईरान के हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव का किया समर्थन

PTV BHARAT 12 MARCH 2026 एजेंसी नई दिल्ली। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित कर ईरान द्वारा खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों और जॉर्डन पर किए गए “अत्यंत गंभीर” हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। इस प्रस्ताव को 15 सदस्यीय परिषद में 13 मतों से मंजूरी मिली, जबकि रूस और चीन ने मतदान से दूरी बनाई। प्रस्ताव में ईरान से तत्काल सभी हमले रोकने की मांग की गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की उसकी धमकियों की भी निंदा की गई है।बहरीन की अगुवाई में लाए गए इस प्रस्ताव का भारत सह-प्रायोजक के बनकर समर्थन किया है, जो ईरान को लेकर भारत की नीति में आये भारी बदलाव को बताता है। यह पहला मौका है जब यूएन में पश्चिम एशिया में किसी तनाव वाले हालात से जुड़े प्रस्ताव का भारत सह-आयोजक बना है।वर्ष 2005 के बाद परमाणु ऊर्जा संव‌र्द्धन के मामले में भारत ने दो बार ईरान के खिलाफ वोट किया है लेकिन मानवाधिकार के मुद्दे पर ईरान को घेरने संबंधी या ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्तावों की वोटिंग में भारत अधिकांश तौर पर अनुपस्थित रहा है।इस बार ईरान पर हमले की शुरुआत से ही भारत यह संकेत दे रहा है कि झुकाव अमेरिका और उन खाड़ी देशों के साथ है जिन पर ईरान हमले कर रहा है। इसके पीछे भारत के रणनीतिक और आर्थिक हित भी हैं। खाड़ी क्षेत्र के देशों जैसे सउदी अरब, यूएई, कतर से ही भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा होता है।इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र के देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जबकि ईरान में सिर्फ 9,000 भारतीय हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर दोनों यह कह चुके हैं कि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले एक करोड़ भारतीय सरकार की सर्वप्रथम प्राथमिकता हैं।बहरहाल, प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सउदी अरब, यूएई और जोर्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति मजबूत समर्थन दोहराया गया है। साथ ही ईरान द्वारा इन देशों के क्षेत्रों पर किए गए हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।सुरक्षा परिषद ने ईरान से इन देशों के खिलाफ सभी हमलों को तुरंत रोकने और पड़ोसी देशों को किसी भी प्रकार की धमकी या उकसावे से दूर रहने की मांग की है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।

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