PTV BHARAT 30 MARCH 2026 छत्तीसगढ़ – रायपुर- ट्रांसजेंडर समुदाय द्वारा संसद भवन के दोनों सदनों में पारित “उभयलिंगी व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026″के विरोध में 30 मार्च 2026 को रायपुर प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। किया। इस प्रेस वार्ता में समिति के पदाधिकारियों के अलावा सामुदायिक लीडर भी सम्मिलित हुए। इस प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद के पूर्व जोन की सदस्य विद्या राजपूत ने बताया कि यह नया कानून पूरे तृतीय लिंग समुदाय के पहचान के अधिकारों का हनन करता है। इस कानून के अंतर्गत केवल कुछ सीमित वर्गों को ही शामिल किया गया है, जबकि ट्रांसमेन और ट्रांसवूमेन, नानबायनरी व जेंडर क्ववीर समुदाय के समूह को निकाल दिया गया है। इस कानून में पूरे ट्रांसजेंडर समुदाय को एक अपराधी के रुप में प्रस्तुत किया गया है। इसी प्रकार इस कानून के धारा 18 को इस प्रकार बनाया गया है कि जिससे कोई भी व्यक्ति किसी भी किन्नर गुरु व उनके परिवार वालों को झूठे मुकदमे में फंसा सकता है। उन्होनें बताया कि इस कानून में संशोधन लाने के लिए समुदाय के व्यक्तियों के साथ किसी भी तरह का परामर्श नहीं किया गया। विद्या राजपूत ने प्रेसवार्ता के माध्यम से केन्द्र सरकार को तत्काल इस कानून को रद्द करने की मांग की है। विद्या राजपूत ने प्रस्तावित कानून में मेडिकल बोर्ड के गठन के प्रावधान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “किसी भी व्यक्ति की जेंडर पहचान को तय करने के लिए मेडिकल बोर्ड बनाना पूरी तरह से असंवैधानिक और अमानवीय है। जेंडर पहचान कोई बीमारी नहीं है, जिसे डॉक्टरों के पैनल द्वारा प्रमाणित किया जाए। यह हर व्यक्ति का मौलिक और व्यक्तिगत अधिकार है, जिसे वह स्वयं निर्धारित करता है।” उन्होंने बताया कि यह प्रावधान ट्रांसजेंडर समुदाय को फिर से उसी अपमानजनक प्रक्रिया में धकेलता है, जहां उनकी पहचान पर सवाल उठाए जाते हैं और उन्हें ‘साबित’ करने के लिए मजबूर किया जाता है। यह न केवल उनकी गरिमा का उल्लंघन है, बल्कि उनके निजता के अधिकार पर भी सीधा हमला है।”
“उभयलिंगी व्यक्तियों संशोधन विधेयक, 2026 को रद्द करने की मांग
