PTV BHARAT 14 APRIL 2026 रायपुर। धर्मांतरण विधेयक 2026 संविधान का उल्लघंन कर रहा है. इसलिए ईसाई समाज इसे काला कानून मानता है। गैर संवैधानिक अंश को हटाने हेतु 45,000 हस्ताक्षर युक्त आवेदन महामहिम राज्यपाल को दिए हैं। छत्तीसगढ़ क्रिश्चन फोरम के अध्यक्ष अरूण पन्नालाल ने कहा कि हमारा सनम्र प्रतिवाद है कि, गैर संवैधानिक विधेयक पर हस्ताक्षर करना राज्यपाल के क्षेत्राधिकार के बाहर है। छत्तीसगढ़ क्रिश्चन फोरम के अध्यक्ष अरूण पन्नालाल ने कहा कि धर्मातरण विधेयक 2006 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पूर्व में पारित हो चुका है। छत्तीसगढ़ राज्यपाल ने हस्ताक्षर करने से मना किया, एवं महामहिम राष्ट्रपति ने भी उक्त विधेयक को लौटा दिया था। वर्तमान में राज्यपाल को भेजा गया संशोधन विधेयक है. जिसके मूल विधेयक 2006, पर राष्ट्रपति अपना मत दे चुके हैं। राज्यपाल राष्ट्रपति के अधिनस्थ संवैधानिक प्राधिकारी है। अतः विधेयक पर पुनः हस्ताक्षर राष्ट्रपति कर सकते है, ना की राज्यपाल। इसलिए धर्मांतरण विधेयक 2026 को राष्ट्रपति को भेज कर अनुच्छेद 200 के प्रावधान का पालन होना चाहिए। छत्तीसगढ़ क्रिश्चन फोरम के अध्यक्ष अरूण पन्नालाल ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में सन 2022 में, देश के समस्त धर्मातरण विधेयक की चुनौती दी गई है। छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शासन से जवाब मांगा है। छः महीने के उपरांत भी छत्तीसगढ़ शासन ने जवाब दाखिल नहीं किया है। आरोप को बगैर साक्ष्य के स्वीकार करना, झूठे आरोप लगाने वालों को संज्ञान से बाहर रखना, जांच की समय सीमा नहीं होना ऐसी और कई विसंगतियां हैं जो न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरित है। जिस पर पुनर्विचार करना आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ क्रिश्चन फोरम को आशंका कि नए धर्मांतरण कानून का होगा दुरूपयोग
