छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पर विभिन्न समाजों ने व्यक्त किया समर्थन

PTV BHARAT 17 APRIL 2026   रायपुर — छत्तीसगढ़ में पारित धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज प्रमुखों ने संयुक्त रूप से सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सामाजिक संतुलन, सांस्कृतिक संरक्षण और वास्तविक धार्मिक स्वातंत्र्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। राजधानी रायपुर में अलग-अलग प्रेस वार्ता में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह विधेयक समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा करेगा और धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी तथा उत्तरदायी बनाएगा। जनजातीय गौरव समाज ने किया समर्थन   जनजातीय गौरव समाज के अध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर और वरिष्ठ नेता विकास मरकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक समरसता में निहित है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में विशेषकर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े ऐसे प्रकरण सामने आए, जिनसे सामाजिक संतुलन प्रभावित हुआ। ऐसी परिस्थितियों में एक स्पष्ट और सुदृढ़ विधिक व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी परिवर्तन पूर्णतः स्वेच्छा से हो। बल, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव से किए गए धर्मांतरण पर रोक लगाने के प्रावधान समाज में विश्वास और स्थिरता को मजबूत करेंगे। यह कानून व्यक्तिगत स्वातंत्र्य और सामाजिक समरसता के बीच संतुलन स्थापित करने का सार्थक प्रयास है।  सतनामी महासभा ने किया स्वागतसतनामी महासभा के अध्यक्ष राजमहंत एवं डॉक्टर बसंत अंचल ने कहा कि समाज की एकता और सांस्कृतिक निरंतरता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण केवल व्यक्तिगत विषय नहीं रह जाता, बल्कि कई बार यह सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित करता है। इसलिए इस विषय को एक संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। पूर्व सूचना और विधिक प्रक्रिया जैसे प्रावधान यह सुनिश्चित करेंगे कि आस्था परिवर्तन निष्पक्ष और स्वैच्छिक हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून समाज में अनावश्यक विवादों को कम करेगा और आपसी विश्वास को मजबूत करेगा।मनवा कुर्मी समाज ने किया समर्थनप्रेस वार्ता में मनवा कुर्मी समाज के अध्यक्ष खोडसेराम कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक संरचना आपसी सहयोग, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि जब धर्म परिवर्तन स्वाभाविक संवाद के बजाय किसी दबाव या प्रलोभन के कारण होता है, तो इससे समाज में असंतुलन उत्पन्न होता है। उन्होंने इस विधेयक को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यह समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करेगा। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगा कि धर्म परिवर्तन केवल व्यक्तिगत आस्था के आधार पर ही हो। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस कानून की भावना को समझते हुए सामाजिक समरसता बनाए रखें। देवांगन समाज ने किया स्वागतवहीं देवांगन समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेश देवांगन ने राज्य सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह विधेयक समाज की दीर्घकालीन अपेक्षाओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि पिछले समय में धर्मांतरण से जुड़े कुछ मामलों ने सामाजिक तनाव को जन्म दिया, जिससे स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस हुई। उन्होंने कहा कि यह कानून पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देगा तथा कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। यह विधेयक “विविधता में एकता” की भारतीय भावना को सशक्त करते हुए समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण करेगा।  सर्व साहू समाज ने किया समर्थन  सर्व साहू समाज के नेता विनय साहू ने कहा कि यह विधेयक सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता और संवाद के माध्यम से ही इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन संभव है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी भी धर्म के विरोध में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था चुनने का स्वातंत्र्य सुरक्षित रूप से प्राप्त हो। इससे समाज में पारस्परिक सम्मान और भाईचारा और अधिक सुदृढ़ होगा।उत्कल गांड़ा महिला महामंच ने किया स्वागत और समर्थनइसी तरह उत्कल गांड़ा महिला महामंच की प्रदेश अध्यक्ष सावित्री जगत ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह गरीबों, महिलाओं और वंचित वर्गों की धर्म तथा संस्कृति की रक्षा करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत किया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति गुमराह न हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह विधेयक समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा और सामाजिक समरसता को और मजबूत करेगा। प्रेस वार्ता में सभी समाजों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सभी ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे आपसी सम्मान, संवाद और समरसता बनाए रखते हुए इस अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप आचरण करें और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सशक्त बनाने में योगदान दें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *