PTV BHARAT 21 APRIL 2026 एजेंसी – रायपुर, 21 अप्रैल 2026, आर्ट ऑफ लिविंग छत्तीसगढ़ के द्वारा दिनांक 20 अप्रैल से 30 अप्रैल तक प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के सामूहिक जनदर्शन हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन राज्य के विभिन्न शहरों जिनमें मुख्य रूप से बस्तर, रायपुर, अंबिकापुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, कोरबा, मिलाई एवं राजनांदगांव में संपन्न होगा।यह आयोजन आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा किया जा रहा है। जात हो कि विगत वर्ष पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के खंडों की पुनस्थापना का दायित्व ग्रहण किया था। इसके पश्चात देशभर में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के सामूहिक दर्शन कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करने तथा प्राचीन भारतीय परंपराओं से जुड़ने का विशेष अवसर मिलेगा।यह कार्यक्रम उत्तीसगढ़ वासियों के लिए पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु इस पावन अवसर का लाभ उठा सकें।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में आर्ट ऑफ लिविंग बैंगलोर आश्रम से स्वामी प्रणवानन्द जी पूरे छत्तीसगढ़ में दस दिनों में सामूहिक रूप से इसके दर्शन के कार्यकम के लिए प्रतिबद्ध है।सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का रहस्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी द्वारा बताया गया विवरणगुरुदेव ने सत्संग में एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक ज्योतिर्लिंग के बारे में बताया, जो सोमनाथ मंदिर के मूल शिवलिंग से जुड़ा हुआ है। यह रहस्य 1000 साल पुराना है।सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला और सबसे शक्तिशाली माना जाता है। 11वीं शताब्दी में मोहम्मद गजनी ने भारत पर आक्रमण किया और 17 बार सोमनाथ मंदिर को लूटा। अंततः उसने शिवलिंग को पूरी तरह तोड़ दिया और उसे जमीन पर गिरा दिया। यह शिवलिंग पहले हवा में तैरता था (लेविटेट करता था), लेकिन आक्रमणकारियों ने इसे ध्वस्त कर दिया। जब शिवलिंग को नष्ट किया गया, तो दक्षिण भारत के अग्निहोत्री परिवार के कुछ संत इसे अपने साथ ले गए। उन्होंने इन टुकड़ी से छोटे-छोटे लिंग बनाए और उन्हें सुरक्षित रखा। 1924 में, उस समय के शंकराचार्य से परामर्श किया गया, तो उन्होंने कहा:”इस शिवलिंग को अभी 100 साल तक बाहर मत लाना। 100 साल बाद, एक विशेष शंकर नाम के संत होंगे उन्हें यह सौंपना, जो इसे सही रूप में स्थापित करेगा।”जनवरी 2024 में, अग्निहोत्री परिवार ने गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी को संपर्क किया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की भविष्यवाणी के अनुसार, 100 साल पूरे हो चुके हैं, और वे इसे गुरुदेव को सौंपने आए हैं। गुरुदेव ने जब इस शिवलिंग को देखा तो उसमें अद्भुत शक्ति महसूस हुई।
छत्तीसगढ़ में प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन कार्यक्रम
