PTV BHARAT 25 JUNE 2026- अंबिकापुर : विशेष लेख : रामगढ़ की ऐतिहासिक-पौराणिक विरासत, सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाओं में बसता है सरगुजा का गौरव
सरगुजा जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आदिवासी संस्कृति के साथ-साथ हजारों वर्षों पुरानी ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहरों के लिए भी जाना जाता है। उदयपुर विकासखंड स्थित रामगढ़ पर्वत पर मौजूद सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं इस समृद्ध विरासत का अनमोल हिस्सा हैं। ये गुफाएं इतिहास, आस्था, कला और पुरातत्व का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती हैं।
रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित इन गुफाओं का विशेष महत्व है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में समय बिताया था। माना जाता है कि जिस गुफा में माता सीता ने निवास किया, वही आगे चलकर सीताबेंगरा के नाम से प्रसिद्ध हुई। इसी कारण यह स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र भी है।
सीताबेंगरा गुफा अपनी अनूठी संरचना के कारण भारतीय इतिहास में विशेष स्थान रखती है। गुफा के भीतर मंच और दर्शक दीर्घा जैसी व्यवस्था दिखाई देती है। कई इतिहासकार इसे भारत के सबसे प्राचीन रंगमंचों में से एक मानते हैं, जहां प्राचीन काल में सांस्कृतिक और नाट्य प्रस्तुतियां आयोजित होती रही होंगी।
सीताबेंगरा के समीप स्थित जोगीमारा गुफा भारतीय चित्रकला की प्राचीन परंपरा का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जाती है। यहां तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के भित्तिचित्रों के अवशेष मिले हैं, जिनमें मानव आकृतियां, पशु-पक्षी, नृत्य और सामाजिक जीवन के दृश्य चित्रित किए गए थे। ये चित्र भारत की प्राचीन कला और सांस्कृतिक समृद्धि का परिचय देते हैं।
इन गुफाओं में मिले शिलालेख भी इतिहासकारों के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इनके आधार पर यह माना जाता है कि यह क्षेत्र प्राचीन काल में कला, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा होगा।
रामगढ़ की एक और विशेष पहचान हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी यह सुरंग अपनी प्राकृतिक बनावट और रोमांचक संरचना के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसके आसपास प्राचीन मंदिरों, मूर्तियों और स्थापत्य अवशेषों की मौजूदगी इस क्षेत्र की ऐतिहासिक समृद्धि को और अधिक प्रमाणित करती है।
आज रामगढ़, सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। यह धरोहर सरगुजा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का कार्य कर रही है।

