PTV BHARAT 01 JULY 2026 रायपुर- आज विज्ञान यह सिद्ध कर चुका है कि यदि किसी बच्चे में जन्म से या जन्म के तुरंत बाद किसी भी प्रकार की दिव्यांगता-जैसे श्रवण बाधिता, दृष्टि बाधिता, बौद्धिक दिव्यांगता, ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी अथवा अन्य विकासात्मक विलंब की पहचान जीवन के पहले कुछ महीनों में हो जाए, तो समय पर चिकित्सा, थेरेपी और उचित प्रशिक्षण के माध्यम से उसके जीवन में आश्चर्यजनक सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।दुर्भाग्य से हमारे देश में आज भी बड़ी संख्या में बच्चों की दिव्यांगता का पता तब चलता है, जब वे दो, तीन या चार वर्ष के हो जाते हैं। तब तक अमूल्य समय निकल चुका होता है। यही वह समय होता है जब बच्चे के मस्तिष्क का विकास सबसे अधिक तीव्र गति से होता है।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने प्रारंभिक बाल्यावस्था, समावेशी शिक्षा, शीघ्र पहचान और प्रारंभिक हस्तक्षेप पर विशेष बल दिया है। अब आवश्यकता केवल नीति की नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन की है। उद्देश्य एक सकारात्मक समाधान प्रस्तुत करना है। जिस प्रकार टीकाकरण को राष्ट्रीय जन-आंदोलन बनाया गया, उसी प्रकार प्रत्येक नवजात की विकासात्मक एवं दिव्यांगता संबंधी प्रारंभिक स्क्रीनिंग भी एक नियमित व्यवस्था बने। सरकारी एवं निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा समय पर पहचान और उपचार से वंचित न रहे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर 4 जुलाई को होगा सेमिनार
