PTV BHARAT 4 JULY 2026 रायपुर : ‘सुपर अल नीनो’ की चुनौती, धमतरी में कृषक मित्रों को मिला अल्प वर्षा से निपटने का गुरुमंत्र – जलवायु परिवर्तन और ‘सुपर अल नीनो’ के कारण संभावित अल्प एवं अनियमित वर्षा की चुनौती से निपटने के लिए धमतरी के कृषि विभाग में शुक्रवार को जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। एक्सटेंशन रिफॉर्म्स ‘आत्मा’ योजना के तहत आयोजित इस विशेष सत्र में जिलेभर के कृषक मित्रों को आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक खेती और फसल बीमा के प्रति जागरूक किया गया, ताकि वे इस जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचा सकें।
विपरीत मौसम में बेहतर प्रबंधन पर विशेषज्ञों की सलाह
प्रशिक्षण में कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने कम वर्षा की स्थिति में फसलों को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न रणनीतियों की जानकारी दी। कृषक मित्रों से कहा गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को समय रहते जागरूक करें।
विशेषज्ञों ने कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों, दलहनी और तिलहनी फसलों को अपनाने की सलाह दी। पानी की बचत के लिए वैज्ञानिक तरीके से धान की सीधी बुवाई (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही खेतों में उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन तथा मिट्टी की नमी बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय भी बताए गए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुविभागीय कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ, आत्मा के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, आत्मा योजना के जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी तथा कृषक मित्र उपस्थित रहे।
फसल बीमा बनेगा किसानों का सुरक्षा कवच
प्राकृतिक आपदाओं और सूखे के जोखिम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। योजना के जिला प्रबंधक ने धान, उड़द, मूंग, कोदो, कुटकी और रागी जैसी अधिसूचित फसलों की बीमा प्रक्रिया, पात्रता और अंतिम तिथि की जानकारी दी। उन्होंने कृषक मित्रों से अपील की कि वे अंतिम तिथि से पहले अधिक से अधिक किसानों का फसल बीमा सुनिश्चित कराएं।
उत्पादन और आय बढ़ाना मुख्य उद्देश्य
कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने कृषक मित्रों से आधुनिक कृषि तकनीकों और शासकीय योजनाओं की जानकारी ग्रामीण स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती अपनाने से विपरीत मौसम की परिस्थितियों में भी कृषि उत्पादन और किसानों की आय को सुरक्षित रखा जा सकता है।

