रायपुर : सौर क्रांति से अबुझमाड़ के दुर्गम गांवों तक पहुंचा स्वच्छ पेयजल

PTV BHARAT 13 JULY 2026 रायपुर : सौर क्रांति से अबुझमाड़ के दुर्गम गांवों तक पहुंचा स्वच्छ पेयजल – छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित और भौगोलिक रूप से दुर्गम अबुझमाड़ क्षेत्र में विकास की नई तस्वीर उभर रही है। क्रेडा (CREDA) की पहल से अब दूरस्थ गांवों में सौर ऊर्जा आधारित ड्यूल पंपों के माध्यम से घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। इस व्यवस्था ने न केवल ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया है, बल्कि उनके जीवन स्तर और स्वास्थ्य में भी सकारात्मक बदलाव लाया है।

पहले ग्रामीणों को पथरीले और पहाड़ी रास्तों से कई किलोमीटर पैदल चलकर झिरिया (खड्डों में जमा पानी) से पानी लाना पड़ता था, जिससे समय की बर्बादी के साथ जलजनित बीमारियों का खतरा भी बना रहता था। अब नेलॉगुर, पदमकोट, जाटलूर, उसेबेड़ा, हरबेल, कस्तुरमेंटा-2, धुरबेड़ा और गुमरका सहित कई दूरस्थ गांवों में सोलर ड्यूल पंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को गांव में ही शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल रहा है।

सोलर ड्यूल पंप सौर ऊर्जा से संचालित सबमर्सिबल पंप हैं, जो बिजली उपलब्ध न होने पर सामान्य हैंडपंप की तरह भी उपयोग किए जा सकते हैं। यह प्रणाली बोरवेल से पानी निकालकर ओवरहेड टैंक तक पहुंचाती है। जल जीवन मिशन के तहत जिले के 371 ग्रामों और पाराटोलों में कुल 1,064 सोलर ड्यूल पंप स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 849 पंप लगाए जा चुके हैं, जबकि शेष स्थानों पर कार्य जारी है।

इस पहल का सबसे अधिक लाभ महिलाओं और बच्चों को मिला है। पहले पानी लाने में दिन का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता था, लेकिन अब गांव में ही आसानी से पानी उपलब्ध होने से महिलाओं का श्रम कम हुआ है और वे अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए समय निकाल पा रही हैं। वहीं बालिकाओं सहित बच्चों को पानी लाने के कार्य से राहत मिलने के कारण उनकी पढ़ाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

सौर ऊर्जा आधारित यह मॉडल पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली पर निर्भरता भी समाप्त करता है। निरंतर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने वाली यह व्यवस्था ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा और सतत ऊर्जा के प्रभावी समन्वय का सफल उदाहरण बनकर उभर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *