रायपुर : मानसून में तेज़ हुई वन संरक्षण गतिविधियाँ, जल संरक्षण से हरियाली और वन सुरक्षा को मिल रहा नया बल

PTV BHARAT 14 JULY 2026 रायपुर : मानसून में तेज हुई वन संरक्षण गतिविधियां, हरियाली और जल संरक्षण को मिला नया बल – मानसून के आगमन के साथ बलौदाबाजार वनमण्डल में वन संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन से जुड़े कार्यों में तेजी आई है। जल संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक पुनर्जनन, वन महोत्सव, मानव-वन्यजीव संरक्षण और वन मार्गों के रखरखाव जैसे कार्यों को व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है।

जल संचयन से बढ़ा भूजल स्तर
‘जल संचय से जन भागीदारी (JSJB) 2.0’ अभियान के तहत पूर्व में निर्मित सॉइल कंजर्वेशन ट्रेंच और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं वर्षा जल से भर चुकी हैं। इससे भूजल पुनर्भरण, वन क्षेत्रों में नमी बनाए रखने और वन्यजीवों को लाभ मिल रहा है।

सीड बॉल अभियान के सकारात्मक परिणाम
देवपुर वन परिक्षेत्र में साजा प्रजाति के सीड बॉल का सफल अंकुरण देखा गया है। अर्जुनी वन परिक्षेत्र में कंटूर पाल और जल संरक्षण संरचनाओं के किनारे सीड बॉल तथा स्थानीय घास प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है, जिससे मिट्टी का कटाव कम होगा और प्राकृतिक रूप से नए पौधों का विकास होगा।

वन मार्गों का रखरखाव जारी
बारिश के दौरान वन मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर क्रॉस ड्रेनेज संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। सुरक्षा श्रमिक लगातार कटाव रोकने और आवागमन सुगम बनाए रखने में जुटे हैं।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में बढ़ी भागीदारी
वन महोत्सव के तहत आयोजित पौधारोपण कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, वन प्रबंधन समितियों, ग्रामीणों और वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

मानव-हाथी संघर्ष रोकने के प्रयास
बारनवापारा अभयारण्य में हाथी मित्र दल को टॉर्च, मेगाफोन और जूते उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि हाथियों की निगरानी प्रभावी ढंग से हो सके और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

प्राकृतिक सुरक्षा के लिए नई पहल
बल्दाकछार वन परिक्षेत्र में सुरक्षा संरचनाओं के किनारे कैक्टस का रोपण लाइव हेज के रूप में शुरू किया गया है। इससे मिट्टी संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों की प्राकृतिक सुरक्षा भी मजबूत होगी।

वन विभाग का कहना है कि मानसून प्राकृतिक पुनर्जनन और वन संरक्षण के लिए सबसे अनुकूल समय है। इसी अवधि में जल संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और जैव विविधता के संरक्षण के लिए समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।

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