लोथल में आकार ले रहा भारत का विश्वस्तरीय समुद्री विरासत संग्रहालय

PTV BHARAT 21 JULY 2026 4,500 वर्ष पुरानी हड़प्पाई समुद्री परंपरा को आधुनिक तकनीक और अनुभवात्मक प्रस्तुतियों से दुनिया के सामने लाएगा राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर

छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने किया राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का अवलोकन; 400 एकड़ में विकसित हो रहा है महत्वाकांक्षी विरासत एवं पर्यटन परिसर

लोथल (गुजरात), 21 जुलाई।
भारत की लगभग 4,500 वर्ष पुरानी समुद्री विरासत, हड़प्पा सभ्यता के उन्नत नगर नियोजन और प्राचीन समुद्री व्यापार की गौरवशाली परंपरा को आधुनिक संग्रहालय तकनीक एवं अनुभवात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश-दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से गुजरात के ऐतिहासिक लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (National Maritime Heritage Complex–NMHC) विकसित किया जा रहा है। पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित मीडिया अध्ययन दौरे के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को परिसर का अवलोकन किया और इसकी परिकल्पना, निर्माणाधीन संग्रहालय, दीर्घाओं तथा प्रस्तावित विभिन्न थीम आधारित सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।
नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज म्यूजियम, लोथल के महाप्रबंधक अमित राठौड़ ने पत्रकारों को परिसर की विशेषताओं और परियोजना की परिकल्पना की जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर केवल एक पारंपरिक संग्रहालय नहीं, बल्कि भारत की समुद्री यात्रा को प्राचीन काल से आधुनिक युग तक समग्रता और अनुभवात्मक स्वरूप में प्रस्तुत करने वाला एक व्यापक विरासत परिसर है। उन्होंने बताया कि लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस परिसर में संग्रहालय के साथ हड़प्पाई नगर का पुनर्निर्माण, तटीय राज्यों के पवेलियन, जेट्टी, जलमार्ग, विभिन्न थीम पार्क, समुद्री एवं नौसैनिक विरासत से जुड़े आकर्षण तथा पर्यटकों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
14 विषयगत दीर्घाओं में दिखेगी भारत की समुद्री यात्रा
अमित राठौड़ ने बताया कि राष्ट्रीय समुद्री विरासत संग्रहालय में भारत की समुद्री यात्रा के विभिन्न कालखंडों और आयामों को दर्शाने वाली 14 विषयगत दीर्घाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें समुद्र और महासागरों से जुड़ी मौखिक परंपराओं से लेकर हड़प्पाई सभ्यता के अग्रणी समुद्री यात्रियों, प्राचीन भारत की समुद्री विरासत, यूनानी-रोमन विश्व से भारत के संपर्क, यूरोपीय शक्तियों के आगमन, समुद्री व्यापार एवं सांस्कृतिक संबंध, गुजरात की समुद्री परंपराओं, मराठा नौसैनिक शक्ति तथा भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के विकास को प्रदर्शित किया जाएगा।
इनके अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया और उससे आगे के क्षेत्रों के साथ भारत के व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संबंध, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, पारंपरिक जहाज निर्माण एवं नौवहन तकनीक, स्वतंत्रता के बाद भारतीय नौवहन तथा बच्चों के लिए विशेष दीर्घा भी संग्रहालय की प्रमुख विषयवस्तुओं में शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि संग्रहालय का उद्देश्य केवल इतिहास की जानकारी देना नहीं, बल्कि आगंतुकों को भारत की समुद्री सभ्यता और उसके विकास की यात्रा का इंटरैक्टिव एवं अनुभवात्मक अनुभव प्रदान करना है।

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